लौह पुरुष

भारत के सरदार तुम्हीं हो,
तुम गरीबों के भगवान।
नमन करे नतमस्तक हो,
तुमको सारा जहान।

हृदय में करुणा का सागर,
वाणी में सिंह दहाड़।
जिसके आगे टिक ना पाए,
बाधाओं के पहाड़।

फौलादी सीना था जिसका,
था खुद पे अटल विश्वास।
भारत मां के टुकड़े होना ,
ना आया जिसको रास।

दर्द ,वेदना जिसके आगे,
अपना शीश झुकाए,
देख लाल को अपने,
भारत मां हर्षाए।

तन मन अपना लोहे जैसा,
जिसने खूब तपाया।
अपने कर्मों से जिसने,
लौह पुरुष बनके दिखलाया।

रग रग में जिसके बह रही थी,
देशभक्ति रसधार।
अंग्रेजी हुकूमत के आगे,
कभी ना मानी हार।

सीने ज्वाला धधक रही थी,
सुन भारत मां की पुकार।
देश की आजादी की खातिर,
भर दी थी जिसने हुंकार।

नाज़ करे भारत मां तुझपे,
नाज़ करे जग सारा।
देश की खुशहाली का सपना,
बस यही लक्ष्य हो हमारा।

सपना (स० अ०)
प्रा० वि० उजीतीपुर
जनपद औरैया

matruadmin

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