आजादी

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न हम हिन्दू न हम मुस्लिम
और न सिख ईसाई है।
हिंदुस्तान में जन्म लिया है तो
सबसे पहले हम हिंदुस्तानी है।
आज़दी की जंग में इन सब ने
जान गमाई थी।
तब जाकर हमको ये
आज़दी मिल पाई थी।।

पर भारत माँ अब बेबस है
और अंदर ही अंदर रोती है।
अपने ही बेटों की करनी पर
खून के आंसू पीती है।
धर्म निरपेक्षय देश हम
सब ने मिलकर बनाया था।
पुनः खण्ड खण्ड कर डाला
अपने देश बेटों ने।।

कितनी लज्जा कितनी शर्म
आ रही है अपने बेटों पर।
भारत माँ रोती रहती एक
कोने में बैठकर।
क्या ये सब करने के लिए
ही हमने आज़दी पाई है।
और धूमिल कर डाला
पूर्वजो उन सपनों को।
फिरसे मजबूर कर दिया
अपनो की लाशों पर रोने को।।

कहाँ से चले थे
कहाँ तक आ पहुंचे।
और कहां तक गिरना है।
भारत माँ के बेटों को अब
क्या बेटों के हाथों मरना है।
नही चाहिए ऐसी आज़दी
जो भाइयों को लड़वाती है।
नही चाहिए ऐसी आज़दी
जो अपास में लड़वाती है।
और मरे कोई भी झगड़े में
पर माँ को ही रोना पड़ता है ….।।

जय हिंद जय भारत
संजय जैन (मुम्बई)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।