
मेरी प्यारी-प्यारी नानी माँ,
जग से न्यारी नानी माँ।
जब भी मैं मायूस होता,
घबरा जाती नानी माँ।।
गले लगाकर मुझे मनाती,
प्यार से समझाती नानी माँ।
छुट्टी में मुझे बाहर ले जाती,
खूब खिलौने दिलाती नानी माँ।।
मेरी तबियत खराब हो जाये तो,
विचलित हो जाती नानी माँ।
जबतक मैं ठीक न हो जाऊँ,
चैन से खुद न बैठती नानी माँ।।
रोज रात को मुझे नयी- नयी,
कहानियाँ सुनाती नानी माँ।
जब भी घर से बाहर जाती,
चिज्जी लाती नानी माँ।।
नवनीत शुक्ल(शिक्षक)
हसवा (फतेहपुर)

