तनाव अर्थात जीवन में नया बदलाव

prerana

आजकल हलचल और काम का बोझ मनुष्य को बहुत जल्दी विचलित कर देता है, जिसे ‘तनाव’ का नाम दिया जाता है। आज इससे सबसे ज्यादा महिलाएं सफ़र कर रही हैं। हम बेटियों को बेटे के बराबर की शिक्षा दे रहे हैं पर,जब वो इस लायक बन जाती तब बात आती। शादी के बाद वहाँ तालमेल बैठाना,घर और बाहर दोनों को संभाल नहीं पाती,तब घर के तांडव और काम के बोझ से तनाव को दावत मिलती है। उसे लगता-क्या मैंने इन सबके लिए मेहनत की,क्या मुझे घर में बैठना चाहिए। वो कुछ दिन ये भी करके देखती,पर सुकून नहीं पाती।
इसी कशमकश में तनाव ग्रसित हो जाती। कुछ अपना घर छोड़ देती, कुछ काम छोड़ देती और कुछ दुनिया..जिसका मुख्य कारण परिस्थिति से परे सोचना अर्थात स्वीकारने की आदत न होना है। औरत कितनी भी आगे बढ़ जाए, पर उसका फ़र्ज़,घर ये स्वीकारना जरुरी है।
दूसरा कारण अहम,हमारे लिए क्या जरुरी है,क्या नहीं, ये परिस्थिति पर निर्भर है। आप एकल हो या परिवार के साथ, दक्षता जरुरी है ।
तीसरा कारण भाग्य,जिसे आजकल की नई पीढ़ी नहीं मानती,पर ये है। आप सबसे लड़ सकते हैं,भाग्य से नहीं। तमाम कोशिशों के बाद जो नहीं मिलता है,वो भाग्य के अधीन होता है।
अब तनाव से छुटकारा पाने के कई सरल तरीके हैं। सबसे अहम धैर्य और शांति,जिसके लिए l योग और ध्यान बनाया गया है। आप शांत मन से सोचें,धीरे-धीरे सब स्थिर हो जाता है
इसमें किस्मत को दूसरा हल हम मान लें। जब परिस्थिति विकट हो और छोड़ने की नौबत आए,यही किस्मत है । अलग होना समस्या का हल नहीं है।
तीसरा-वर्तमान में स्थिर हो जाएं। हमारे साथ क्या बुरा हुआ, वो अब सुधारना हमारे वश में नहीं है। भविष्य में उज्जवल होना है,तो भूत को त्यागना है। अब बस बचता है वर्तमान,उसमें जीना सीखें और उसे संवारें
इन सबको हल करने का सबसे सरल उपाय आपस का वार्तालाप है। अपनों का साथ साझा करें,हल बाहर नहीं,घर में ही होता है।
तो तनाव को दूर करें और जीवन में बदलाव लाएँ। कुछ अच्छा करें,अलग करें और नाम करें। बुरे विचारों से ग्रसित होकर मानव जीवन व्यर्थ न करें।
यह याद रखिए कि ‘जैसी होगी मनस्थिति, वैसी होगी परिस्थिति’..
अर्थात मनस्थिति बदलें, सकारत्मक, सोचें तो परिस्थिति स्वयं बदल जाएगी। जब भी तनाव आए,निश्चित है आपके जीवन में नया बदलाव इंतजार कर रहा है तो धैर्य रखें।

                                                                               #प्रेरणा सेंद्रे 

परिचय: प्रेरणा सेंद्रे  इन्दौर में रहती हैं। आपकी शिक्षा एमएससी और बीएड(उ.प्र.) है। साथ ही योग का कोर्स(म.प्र.) भी किया है। आप शौकियाना लेखन करती हैं। लेखन के लिए भोपाल में सम्मानित हो चुकी हैं। वर्तमान में योग शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं।

matruadmin

Next Post

गुरुवर विद्यासागर एक मसीहा

Fri Apr 21 , 2017
लुट गई है पूरी बस्ती, बस मिट रही है हस्ती। अब आया एक मसीहा, आगम की उसमें मस्ती।। बढ़ता ही जा रहा है, सच को जिता रहा है। जिनवर का है दीवाना, राग-द्वेष नशा रहा है।। अब है समझ में आया, कुछ भी न मैंने पाया। शिवमग मिला उसी को, […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।