कुछ अच्छे पल,कुछ बुरी यादें, कुछ झूठे और कुछ सच्चे वादे। न कोई दोस्त पक्का-सा है, न कोई दुश्मन पराया-सा है। बीते साल को विदा करते हैं और कुछ नए वादे करते हैं। गलतियाँ न दोहराएंगे,ये वादा करते हैं, हर पल मुस्कराने का खुद से वादा करते हैं। न साथ […]

आज सखी ‘शिक्षक यात्रा’ पर हम पंख लगा लेते हैं, सब कुछ भूलकर आज नई उड़ान भरते हैं। भूल जाते हैं आज २०-४० उम्र का फासला, जी लेते हैं आज मिलकर जो पल हमें  मिला। वो सुबह उठकर घर की व्यस्तता, सात बजे स्कूल पहुंचना,यही होता था पता। स्कूल में […]

उम्र के जिस पड़ाव का अहसास होता था, उस उम्र को पार कर चुकी हूँ मैं… लगता है थोड़ा बदल चुकी हूँ मैं। जिन रिश्तों से आघात पहुँचा था, उनको अनदेखा करने लगी हूँ मैं… लगता है थोड़ा बदल चुकी हूँ मैं। जिन सखियों का पता खो चुकी थी, उन […]

जन्म तो दिया तुझे पर बड़ा करूँ कैसे, डर लगता है जालिमों से मैं तुझे समझाऊँ कैसे।  है पग-पग आडम्बर  खड़ा है मानव दैत्य बनकर,  तू ठोकर न खा ले कहीं  ये डर तुझे बताऊँ कैसे। भविष्य तो मैं बना दूंगी तुझे मंजिल तक पंहुचा दूँगी, पर ब्याह के बाद […]

नादान,नासमझ,अठखेली-सी होती है, यारों उम्र बड़ी ही अजीब पहेली होती है। बचपन में बड़े होने का सोचते हैं, बड़े जब हुए तो बचपन याद करते हैं। जवानी में बुढ़ापे के सपने संजोते हैं, बुढ़ापे में जवानी के दिन याद करते हैं। समझ आने पर भगवान पर हंसते हैं, जब जरूरत […]

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जिंदगी की हकीकत कैसी एक पहेली है, साथ सब हो फिर भी कुछ अधूरी है। कोई जो किसी की खातिर सब छोड़ आता है, दूसरा सब होते हुए कुछ और पा जाता है। सिर्फ एक विश्वास का अहसास उन्हें जोड़ता है, साथ-साथ चलकर बहुत दूर को मोड़ता है। एक अथाह […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।