ब्रज चौरासी चालीसा

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कण कण में राधारमण,जमनाजल का पान।
चेतन वल्लभ साधना,गाया है रसखान।।

जयजय भूमी जय ब्रज मंडल।
जमना पूजन नीर कमंडल।।1
चौरासी परिकम्मा करते ।
जीवन धन्या श्याम सुमरते।।2
पैदल चलते कर फलहारी।।
बिनु पादुक से महिमा भारी।।3
सादा खाते नीचे सोते।
संतो जैसा जीवन जीते।।4
पल पल बोलें राधे राधे।
मन में कहते श्याम मिलादे।।5
सतयुग में ध्रुव ने तप कीना।
नारद मुनि से मंतर लीना।।6
त्रेता में लवणासुर तारा।
रामानुज शत्रुघन संहारा।।7
फिर परिकम्मा पूरी कीना।
धरम लाभ का सबजस लीना।।8
पंचदशी में माधव आये।
ब्रज चौरासी के गुण गाये।।9
सदी सोलवी वल्लभ स्वामी।
बिट्ठल चेतन रूप गुसामी।।10
गोस सनातन भट नारायण।
चतुरा नागा निम्बक आयन।।11
कोस चौरासी ब्रज कहलाना।
बिरजा अरु हरिदास बखाना।।12
मीरा भी वृन्दावन आई।
जन्मभूमी की महिमा गाई।।13
वल्लभ महप्रभु बिट्ठलनाथा।
गोकुलनाथा जग विख्याता।।14
हे योगेश्वर आनंद कंदा।
हे जगदीश्वर जगत मुकुंदा।।15
मथुरा शूरसेन रजधानी।
वेद पुराणन कहीं बखानी।।16
मधु दैत्य ने इसे बसाया।
मधूपुरी जब नाम धराया।।17
उग्रसेन परतापी राजा।
दुष्ट कंस से दुखी समाजा।।18
मथुरा नगरी यमुना तीरा।
देती सुख हरती सब पीरा।19
जनम जेल में कृष्ण मुरारी
साधू-संतों के हितकारी।।20
सन पंद्रह सौ पंद्रह पाये।
चेतन प्रभु वृन्दावन आये।21
वृंदावन की शोभा प्यारी।
कालिदास रघुवंश बखानी।।22
तीन ओर से जमना घेरा।
पंछी करते पेड़ बसेरा।।23
बारह जंगल चौबिस उपवन।
पांचो पर्वत जाने सबजन।।24
गायो सूरा ब्रज चौरासी।
कणकण बसते राधे रानी।।25
आओ मिल चौरासी घूमें।
मंदिर परवत वन को पूजे।26
छाछठ अरब तीरथ आना।
चतुर्मास कह वराह पुराणा।27
शांत सतोहा ध्रुव तपोवन
राधाकृष्णा कुंड तालवन।।28
मधू कुमुदवन अरु गोवर्धन।
बहुला काम्यक सोच सरोवर।।29
जतीपुरा लछमन का मंदर।
नंदगांव बरसाना जोबट।।30
काम्य महलजल औ कमोदवन।।
राधे राधे भज चतुरानन।।31
चरण पहाड़ी साक्ष्य गुपाला।
कोकिल कोसी नोहा झीला।।32
चीर घाट अरु सिरी भदरावन।
शेरा गढ़ अरु भांडीरा वन।।33
बेल रमावन कुंड गुपाला।
दाऊजी का महल निराला।।34
कबीर भोयी अरु शिवमंदर।
ब्रह्मांड घाट अरु चिंताहर।।35
गोकुल लोहा मोह महावन।
ब्रज चौरासी चल वृन्दावन।।36
हर पड़ाव पे लगे सुहावन।
पेड़ कदंबा बंशी गावन।।37
मोर पपीहा राग सुनाते।
लाल लंगुरा नाच नचाते।।38
आते जाते राधे बोलें।
भजन कीर्तन भरें किलोले।।39
यह चालीसा जो भी गावे।
ब्रजराज को तुरतहिं पावे।।40

ब्रज चौरासी जातरा, राधेश्यामा गान।
जीवन में कर साधना, कहत है कवि मसान।।

डॉ दशरथ मसानिया
आगर मालवा म प्र

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।