तकनीक सहायक हो स्वामी नहीं

sunil patel
तकनीक के विकास और इसके बढ़ते प्रयोग ने जिंदगी की रफ़्तार इतनी तेज कर दी है कि,एक पल के लिए तो इंसान समय से भी आगे निकलने की कोशिश करता है। भविष्य देखने की यह चाहत मानो सच साबित हो सकती है,अगर वैज्ञानिकों की मानें तो,क्योंकि वे ऐसी तकनीक के विकास पर काम कर रहे हैंl  यह तकनीक,कम्प्यूटर  की सहायता से इंसान को उसका भविष्य बता देंगी। बहरहाल इस दिशा में बढ़ते वैज्ञानिक कदम इस बात की ओर इशारा कर रहे हहैं कि,मनुष्य कितना असंतोषी हो गया है जो वर्तमान को दांव पर लगाकर भविष्य की सीढ़ियों पर पैर रखकर चलने की कोशिश कर रहा है।
रोजमर्रा की ज़िन्दगी में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी साधनों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है जिसे देखकर लगता है वो दिन दूर नहीं,जब रिश्ते सिर्फ मशीनों से निभाए जाएंगे। इंसान का इंसान के प्रति नज़रिया तेजी से बदल रहा है,जिसके परिणाम स्वरुप आजकल के बच्चे कुछ जरुरी जैसे-माँ-बाप,भाई-बहन के अलावा बहुत कम रिश्तों से ही जुड़ना चाहते हैं। दादा-दादी,नाना-नानी और अन्य रिश्ते तो मानो कुछ समय बाद सिर्फ किस्से-कहानियों  में ही मिलेंगे।
ज़िन्दगी की बढ़ती आपा-धापी में माँ-बाप के पास भी इतना समय नहीं रहता है कि,वो अपने बच्चों को संस्कार, शील,गुण और ज्ञान दे सकें। इसलिए आजकल के बच्चे सोशल मीडिया(फेसबुक,व्हाट्सएप्प,वीडियो गेम आदि)से नाता जोड़ लेते हैं,या अन्य तकनीकी सुविधाओं(जैसे टीवी,मोबाइल,गैजेट्स आदि) में ही व्यस्त रहते हैंl इससे यह अपना वास्तविक विकास नहीं कर पाते हैं,जिसके कारण बीमारियाँ बढ़ रही हैं। सभी को चाहिए कि,इसके प्रति जागरूक रहें और तकनीक को सहायक बनाएं,स्वामी नहीं..वरना एक वक़्त आएगा,जब तकनीक इंसान को ही निगल जाएगी।
                                                                                #सुनील रमेशचंद्र पटेल
परिचय : सुनील रमेशचंद्र पटेल  इंदौर(मध्यप्रदेश ) में बंगाली कॉलोनी में रहते हैंl आपको  काव्य विधा से बहुत लगाव हैl उम्र 23 वर्ष है और वर्तमान में पत्रकारिता पढ़ रहे हैंl 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।