बच्चे

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बच्चे तो आखिर बच्चे होते हैं ,
थोड़े नटखट थोड़े चंचल होते हैं ।
बात हमेशा ये सच्ची ही करते ,
झूठ , फरेब और नहीं, धोखा करते ।
चुलबुली और प्यारी बातें करते ,
बच्चों से घर आंगन महका करते ।
हो – हल्ला व धमाचौकड़ी मचाते ,
सबकी नकल और एक्टिंग करते ।
दादी दादा का मन खूब बहलाते ,
वे भी संग इनके बच्चा बन जाते ।
नित्य नई नई फिर शरारतें करते ,
स्कूल जाने से ये घबराते हैं ।
बोझ बस्ते का वहन न कर पाते हैं ,
मन की बात ये कभी छुपा न पाते ।
कभी कभी ये गुस्सा भी हो जाते ,
थोड़े प्यार से फिर मान भी जाते ।
बच्चो में होती भगवान की मूरत ,
भोले भाले हैं दिल के खूबसूरत ।
बच्चे तो आखिर बच्चे होते हैं ।,
थोड़े नटखट थोड़े चंचल होते हैं ।
# रीता “जयहिन्द हाथरसी” दिल्ली

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Mon Nov 11 , 2019
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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।