सुभाष चंद्र बोस 

alaka jain mumbai
सुभाष चंद्र बोस जी से
 कौन न होगा परीचित
जन्म हुआ 23 जनवरी 1897 को
 उड़ीसा प्रांत के नगर कटक में
पिता थे उनके
 रायबहादुर जानकी नाथ बोस नगर पालिका और जिला
 परिषद के थे वो प्रधान
नामी गिरामी वकील व
अंग्रेजो के भक्त थे ज्यादा
 इच्छा थी बेटा आईसीएस कर ब्रिटिश शासन पाय ऊंचा पद
आईसीएस की परीक्षा पास कर प्रशिक्षण के लिए गए इंग्लैंड भी  थे जन्मजात विद्रोही अंग्रेजों के
गुलामी करना किया अस्वीकार
इसका परिचय प्रेसिडेंसी कॉलेज
में अंग्रेजी अध्यापक के भारत के
 प्रति अपमानजनक शब्द बोलने पर  दिया चाटा मार
नेतृत्व एवं संगठन करने
 की शक्ति थी अदभुत पाई
  स्वराज्य दल को लिया अपना
  नौकरी भी दी ठुकरा
प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत
 आने पर बहिष्कार करने
वालों में थे ये अग्रणी क्रोधित हो सुनाई  सजाए काला पानी
कर्मठ सदस्य गरम दल के
  चाहें भारत में पूर्ण स्वराजय
 नेताजी की अंनशन घोषणा सुन
 डर अंग्रेजों ने छोड़ा कारागार से
 उनके घर पर ही नजर बंद कर
पहरा बैठाया चारों ओर
जापानी  से किया प्रेम विवाह
बिटिया हुई एक प्यारी सी
 अब बनाई आजाद हिंद फौज
 नारा दिया जय हिंद इन्होंने
एक विमान दुर्घटना में
हुआ इनका निधन
#अलका जैन
मुंबई(महाराष्ट्र)
परिचय-
नाम -अलका जैन
 शिक्षा -बीकॉम पास
 विद्या -गद्य पद्य गजल 
काम -कलम ही मेरी पहचान है 
सम्मान  लघु कथा श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए
 मायड बोली रतन
 साहित्य सारथी
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी और भी कई सारे श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए 
प्रकाशन -काव्य गंगा ऑनलाइन ऐप में पाँच कविताओं का संग्रह 
बोली -खड़ी हिंदी
 रुचि -संगीत सुनना, कविता लघु कथा( लिखना)
  वर्तमान पता -मुंबई(महाराष्ट्र)

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।