इंसान की सोच क्या है

sanjay
दोस्त आज कल के इस युग मे जहां एक इंसान दूसरे इंसान को कुछ नही समझता सिर्फ खुद को ही श्रेष्ठ कहता है। मैं सही और बाकी के सब गलत या में पढा लिखा बाकी के सब…../ पहले के समय मे जब राजाओ का शासन था तब राजदरबार में ऐसा ही कुछ होता था। एक छोटा सा उदाहरण देकर अपनी बात को में कहने और समझाने का प्रयास कर रहा हूँ ।
एक राजा के दरबार मे तीन महाविध्दमान थे। उन सभी की ये विशेषता थी कि जो भी व्यक्ति कोई बात कहता था उसे सुनकर उन्हें याद हो जाती थी। एक को एक बार मे दूसरे को दो बार मे और तीसरे को तीन बार मे ।
जिसके कारण राजा की नगरी में कोई भी विध्दमान इस तीनो को कभी भी नही हर पा रहा था। उसका कारण याद उनकी याददाश ।राजा ने एक बार कहा कि जो भी इन तीनो को हराएगा उससे हम राजकुमारी की शादी करेंगे। सारे शहर में एलान करवा दिया ।परन्तु कोई भी उन तीनो को नही  हर सक रहा था। कोई बात ये घटना का लोग जिक्र करते और जब राजा इन तीनो से पूंछ तो ये बोलते की मुझे तो ये सब पता है।उसका कारण था उनकी स्मरण शक्ति ।एक दिन एक नाई आया और राजा के दरबार का घंटा बजाया कहाँ मेरे एक बात है जो इन तीनो को नही मालूम और न ही इन्हें याद होगी। सम्मान के साथ राजा के सामने उसे लाया गया और बोलो बताओ अपनी बात या वो घटाना जो हमारी इन तीनो विध्दामानो को याद नही और न ही मालूम है।
उस व्यक्ति से बड़े ही सामन भाव से कहाँ हे राजन इन तीनो विध्दामान के पूर्वजों से हमारे पूर्वजों को इनके सेवा करते थे जिसके पैसे उन्होंने तब नही दिए थे और कहां था कि मेरे पुत्र आपके पुत्र को ये राशि दे देंगे । इसलिए राजन आज मुझे पैसे की जरूरत है तो आप इन लोगो से पूछ लो कि इन लोगो को पता है ना या नही।
अब विध्दमानो के समाने बहुत बड़ी दुविधा उत्पन्न हो गई। यदि वो हां कहते है तो उन्हें नाई को पैसे देने पड़ेंगे, यदि कहते है कि नही पता तो उसकी शादी राजकुमारी के साथ हो जाएगी। कुल मिलाकर देखेंगे तो बहुत बुरे वो फस गए ना ।अब इंसान क्या सोचता है कि मैं क्यो । इसलिए राजा को बोल देते है तीनो की हे राजन हम लोगो को नही पता और नाई की शादी रककुमारी से हो जाती है । इसी तरह से आज कल के बहुत विध्दामान लोग है  जो कही पर भी अपनी टांग को फसा देते है। क्या ये सही है ? या फिर अन्य सभी लोगो की भावनाओ को ध्यान में रखना चाहिए । यदि कोई रचना आपने पढ़ी तो क्या अन्य लोगो ने पढ़ी या नही पढ़ी ।सभी बातों को समझना चाहिए । और किसी की भी रचना पर बिना सोचे समझे कोई भी कमेंट नही करना चाहिए यदि पढ़ी है तो कोई भी कमेंट मत करो न। एक लेखक किस तरह से रचनाएं लिखता है । वो ही समझ सकता है ? आपने क्या किया ? उसकी सारी मेहनत पर अपना … देकर उसका सम्पट सुआ कर दिया ।
हमे हर किसी की भावनाओ को समझना चाहिए और उसकी कद्र करना चाहिए । मेरा लेख किस व्यक्ति विशेष पर नही है । इसे समझे और फिर अपनी राय को दर्शय जी।

#संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

matruadmin

Next Post

राजनीति का मुख्य उद्देश्य “जनसेवा” या फैमिली कैरियर?

Sun May 26 , 2019
इतिहास साक्षी है जब-जब विश्व के किसी भी देश में जनता ने आंदोलन आरम्भ किया और जनहित हेतु आंदोलन आरम्भ हुआ तो उसका मुख्य कारण था की जनता में उपजा हुआ असंतोष। जिसके परिणाम स्वरूप उस देश की जनता ने आंदोलन किया और अपने अधिकारों की रक्षा हेतु उस देश […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।