गंदगी

kalpana gupta
स्वस्थ और अस्वस्थ के दो
पहियों में पिस रहा है इंसान,
एक तरफ भगवान है
एक तरफ शैतान।
उस रचनाकार की रचना देखो
जिसने बनाया है इंसान
करे है काम ऐसे ऐसे
कर दिया जंगल बाग
बगीचों को वीरान
नदी नालों को भी न छोड़ा
कैसे कमाये पैसे वो
इसी काम में दौड़ाये
अपने दिमाग का घोड़ा,
क्या क्या उपज दिमाग में
इसके आए
पॉलिथीन के बैग इसने बनाये
जब इस से भी न दिल भरा
धुएँ से गाड़ियों ,फैक्ट्रियों के
 किया इतना परेशां ,
 सांस लेना भी  हुआ मुहाल
बड़े बड़े आविष्कार कर गया तू
लेकिन गंदगी हो कैसे खत्म
इससे रहा बेखबर तू
खोज रही हूँ आज मैं बड़ा घर
बड़ी ट्रेन ,बड़ा जहाज़ बड़ा देश
अगर हवा
ही वहां की गंद भरी हो
तो फिर तेरा यह कैसा जहान
माना के इस समय पैसा है सब
पैसा है रब,
मगर ऊपर और भी है कोई
रखता है जो सबकी ख़बर ।
#कल्पना रत्न
#परिचय
नाम       कल्पना गुप्ता
क़लमी नाम   ‌‌ कल्पना रत्न
व्यवसाय    सीनियर लेक्चरर (इक्नोमिक्स)
जन्म   मई 1965 भद्रवाह (जम्मु कश्मीर)
कल्पना गुप्ता से कल्पना रत्न तक का सफर:-मै एक
मामूली सी लेखिका हूं। मेरी साहित्य जगत में ज़्यादा पहचान नहीं है। मैं बचपन से ही अन्तर्मुखी हूं।प्रारम्भ से ही मैं अपने अच्छे या बुरे पल एक डायरी में लिखा करती थी। आहिस्ता -2मुझे लिखने का शौक पैदा हो गया।एक बार मेरी मैम रत्न प्रभा जी ने मुझे लिखते हुए देख लिया, उन्होंने मुझे 2001में महात्मा गांधी जी के जन्म दिवस के साप्ताहिक समारोह में कविता सुनाने के लिए प्रोत्साहित किया।उस समारोह में डोगरी के महान लेखक, उपन्यासकार केवल कृष्ण शाकिर जीबी आए हुए थे। उन्होंने मेरी प्रशंसा करते हुए मुझे एक उपन्यास संरकड भेंट स्वरूप दिया।तब से ही मैं कल्पना गुप्ता से कल्पना रत्न बन गई। लेकिन मेरी विडंबना कि कुछ घरेलू समस्याओं के कारण मैं अपने ‌ इस शौक को आगे नहीं ले सकी। परन्तु अब वर्तमान में अनु जी ने मेरी इस प्रतिभा को नई पहचान दी,तथा समय समय पर अनु जी‌ तथा वरुण जी मेरा मार्ग दर्शन भी कर रहे हैं।
         मेरी पहलू कविताएं थी” नारी” ,”कारगिल की कहानी” आदि जो मैंनै 1999 में लिखी थीं। मैं ‌ हमेशा 
चाहती थी कि कोई मेरी लेखनी को पहचाने। मित्रों तथा मेरे सहकर्मीयों से भरपूर सहयोग मिला। लेकिन जब से मुझे “The Writers Group”का‌ साथ मिला तथा मुझे इस ग्रुप का सदस्य बनाकर जो उपकार किया, मैं उसे कभी नहीं भूल सकती। मैं सदैव अपने मित्रों के साथ काम करना चाहूंगी तथा कलमकार की कामयाबी ,प्रतिष्ठता,एवं सम्मान ही मेरे जीवन का लक्ष्य होगा।मैं बाबा लाल जी से चाहूंगी कि वह मेरे पे अपनी कृपा बनाकर रखें और मेरे लेखिका बनने के सपने को साकार करें।

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