जीवन बस इक धोखा है।

ajay ahsas

दुनिया की उलझन में पड़कर, सब ताने बाने बदल गये
हम तो वैसे के वैसे रहे, पर दोस्त पुराने बदल गये।
ये बात नही परिवर्तन की, ये तो सब समय का झोंका है
बस मौत ही सच्चा साथी है, ये जीवन बस इक धोखा है।।
इक सुख पाने की चाहत में , कितना सारे दुख झेल गये
सदा विजेता बनने को हम , कितनी पारी खेल गये।
सोचा सब हमको मिल जाये, पर हाथ आया बस खोखा है
बस मौत ही सच्चा साथी है, ये जीवन बस इक धोखा है।।
धन की खातिर सुबह शाम किया, काम किसी का अपने नाम किया
खुद का सम्मान बढाने को,इक दूजे का अपमान किया।
खुद अपनी नींव उठाने को, हमने कितना घर फूंका है
बस मौत ही सच्चा साथी है, ये जीवन बस इक धोखा है।।
जब हाथ मिलाया जीवन से , तो लगा कि कितना सुन्दर है
पर साथ चले तो पता चला, बस दुख ही इसके अन्दर है।
कुछ वर्ष महीनों हफ्तों का, ये जीवन बस कुछ पलों का है
बस मौत ही सच्चा साथी है, ये जीवन बस इक धोखा है।।
रोता सा जीवन देख देख, खुशियां भी खुशी से मुस्काई
खुशियां भरने को जीवन में, कुछ ने बजवाई शहनाई
हम जिसे समझते हरियाली, वास्तविकता में वो सूखा है
बस मौत ही सच्चा साथी है, ये जीवन बस इक धोखा है।।
सब कुछ करते जिसकी खातिर, वे ही हमें आंख दिखायेंगे
कुछ ऐसा हम कर जायेंगे, मरने पर ढूढें जायेंगे।
जीवन का अपने अनुभव है, “एहसास” ये बहुत अनोखा है
बस मौत ही सच्चा साथी है, ये जीवन बस इक धोखा है।।

#अजय एहसास

परिचय : देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के सुलेमपुर परसावां (जिला आम्बेडकर नगर) में अजय एहसास रहते हैं। आपका कार्यस्थल आम्बेडकर नगर ही है। निजी विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ हिन्दी भाषा के विकास एवं हिन्दी साहित्य के प्रति आप समर्पित हैं।

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।