तुम्हारी नजरों में मैं अब……….

minakshi vashishth

तुम्हारी नजरों में मैं अब
बहुत चालाक हो गई हूं
क्योंकि तुम्हारे झूठे आश्वासन और सच्चे वादे के बीच का
फर्क जो समझने लगी हूं
तुम्हारे झूंठे वादे
चांद को मेरे जूडे में नही सजा सकते
और न ही मेरी माँग सजा सकते है सितारों से
अब जानती हूं मैं
अब तुम्हारे दिखाऐ वो सपने
नहीं दिखा सकते मुझे
सतरंगी इन्द्रधनुष
अब तुम्हारी नजरों में
मैं उच्छृंखल हो गयी हूं,,
क्योंकि अब नही सजा सकते
तुम मुझे किसी खिलौने की तरह
और न ही तोड़ पाओगे मुझे
अपने अंदर सजाकर ,,
मैने देख लिया है तुम्हारे अंदर के अँधेरों को , ,
टटोल लिया है तुम्हारी कमजोरी को,
,,और जान चुकी हूं इस सच को भी
कि तुमसे कही अधिक समर्थ हूं “मैं”
अब जान चुकी हूं ‘ मैं ‘
अपनी सार्थकता को
और अपने निजत्व को भी ,
जान लिया है मैने
अपने शब्दों
और तुम्हारे अर्थों को भी ,
आखिर तुमने ही तो निर्धारित की थी मेरी जगह
तुम्हारे चरणों में , ,
जानती हूं कितना दुःसह होगा
तुम्हारे लिये मुझे अपने समकक्ष देखना,,
जानती हूं मैं
कि मेरा ये बदला रुप अब तुम्हे बर्दास्त नही होता
मेरा ये वस्त्रालंकार सुसज्जित रुप
भला कहाँ अच्छा लगेगा तुम्हे
तुम्हारे हाथों को तो
आदत पड़ चुकी है
सदियों से चीर हरण की
बार-बार अग्नि -परीक्षा देकर भी
नही हटा सकी ‘मैं ‘ मेरी पवित्रता पर लगा प्रश्नचिन्ह ??
तुम्हारे अपराध की
सजा मैने
पाषाण बनकर झेली
युगों -युगों तक ,,,
मैं ‘ तुम्हे खटकती हूं
क्योंकि अब मैं तुम्हारे
खूँटे से बँधी मेमनी
जो नही रही
सीख लिया है मैने मेरे अधिकारों को पाना , ,
पाना सीख गयी हूं अब ‘मैं’
मेरे हिस्से की धूप ,
बरसातें और ठंडी हवाऐं भी
मेरी खुशी अब तुम्हारे मूड की मोहताज नही , ,े
मैने भी अब सीख लिया है
खुल कर हँसना।।
खुल कर रोना।।
नही बन कर रहना अब मुझे
तुम्हारे क्रोध की शिकार खंडित मूर्ति ।।
नहीं देखनी मुझे
ये दुनिया अब
तुम्हारे चश्मे से ,,,
मैने भी अब सीख लिया है
पुरुषों की दुनिया में जीना . …..!.

#मीनाक्षी वशिष्ठ
नाम->मीनाक्षी वशिष्ठ
 
जन्म स्थान ->भरतपुर (राजस्थान )
वर्तमान निवासी टूंडला (फिरोजाबाद)
शिक्षा->बी.ए,एम.ए(अर्थशास्त्र) बी.एड
विधा-गद्य ,गीत ,प्रयोगवादी कविता आदि ।

matruadmin

Next Post

भीड़ में भी अकेला

Thu Nov 22 , 2018
आदिकाल में रहा जंगलों में आदमी करता रहा झुंड बनाकर पशुओं का शिकार आज का आदमी कहलाता है सभ्य करता है शिकार आदमी का होता है शिकार आदमी का खो गए झुंड आधुनिकता की चकाचौंध में हो गया आदमी भीड़ में भी अकेला #विनोद सिल्ला   जीवन परिचय   विनोद […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।