माँ की फुलवारी

namrata
पत्तों के खड़खड़ाने का शोर
चिड़ियों के चहचहाने की गूंज
बाग़ में तितलियों का उड़ना
पत्तों पर ओस का गिरना
कुछ नहीं बदला पर तुम नहीं हो
कुएं में पानी का स्तर
मुँडेर पर गिलहरी की किट पिट
मंदिर की आरती का स्वर
मस्जिद की भोर की अज़ान
कुछ नहीं बदला पर तुम नहीं हो
आम की मिठास, लीची का पकना
नारियल का लगना, जामुन का झड़ना
बालकों का बाग़ में अटखेलियां करना
गिरना और नाचना दौड़ना
कुछ नहीं बदला पर तुम नहीं हो
बछड़े का माँ से चिपकना
गैया का करुणा से निहारना
बच्चों का ज़िन्दगी से लड़ना
माँ की याद में सिसकियाँ भरना
कुछ नहीं बदला पर तुम नहीं हो
या शायद तुम हो माँ, पर दिखती नहीं.
#नम्रता
परिचय- नम्रता, बिहार के एक छोटे से शहर, मोतिहारी (जिला-पूर्वी चम्पारण जो ऐतिहासिक तौर पर  चम्पारण सत्याग्रह १९१७ के लिए जाना जाता है) में जन्मी और पली-बढ़ी, मेरी उच्च माध्यमिक शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, पूर्णियां से हुई है I साहित्य पढ़ने और लिखने में रूचि रखती हूँ I लघु कविता पाठन विद्यालय और कॉलेज स्तर पर किया है I  कॉलेज से प्रकाशित वार्षिक पत्रिका का संपादन भी किया है I वर्तमान में सॉफ्टवेयर अभियंता बतौर बेंगलुरु में कार्यरत हूँ I मौका मिलने पर सहकर्मियों को हिंदी की जानकारी देती रहती हूँ I  ‘कमल की कलम’ द्वारा चयनित 73 कविताओं में मेरी भी एक कविता ‘लौट आओ माँ’ रही।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।