पशुबंदी और एटीएम से गोबर

1
0 0
Read Time6 Minute, 6 Second

javahar

किसी जमाने में वे ‘अबे ओ बच्चा’ थे, फिर बच्चा बाबू कहलाए..सरकार में आ गए तो श्रीमंत बच्चा बाबू हो गए ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने का हल्ला हुआ तो अब सर बी.बी. हैं। स्मार्ट सिटी बनाने की जिम्मेदारी सर बी.बी. पर भी है,सो होली के ठीक पन्द्रह दिन पहले उन्होंने प्रजा के लिए दो आदेश निकाले कि रात बारह बजे के बाद से नगर में पशुबंदी लागू की जा रही है।चौपाए पशुओं को नगर में रखना गैरकानूनी माना जाएगा,सारे चौपाए पशु तुरंत बाहर किए जाएं। नगर चोर-उचक्कों, गुंडे-बदमाशों, हत्यारों-लुटेरों, भ्रष्टाचारियों, बलात्कारियों,झूठे-बेईमानों,लम्पट-पाखंडियों आदि दो-पाए पशुओं के रहने की जगह है। चौपाए अक्सर उनके काम में बाधा बनते हैं,और यहाँ-वहाँ गंदा करते रहते हैं,इनसे नगर की शोभा प्रभावित होती है। बहुत सारे लोग सरकार की कल्याण योजनाओं का लाभ लेते हैं और पशुओं को चारा खिला कर श्रेय उनको दिया करते हैं, इस पर तुरंत रोक लगाने का निर्णय लिया गया है, लेकिन उन नस्ली और पालतू कुत्तों को पशुबंदी से छूट रहेगी जिनके आधार कार्ड बनें होंगे। उन कुत्तों को भी छूट का लाभ मिलेगा,जो भवन या प्लाट के मालिक हैं और अग्रिम संपत्ति कर जमा कर रहे हैं। उन सभी गधों को भी स्मार्ट सिटी में रहने की छूट रहेगी, जिनके नाम मतदाता सूची में पहले से दर्ज हैं,और जो हर चुनाव में सरकार के हाथ मजबूत करते आए हैं।
दूसरा आदेश यह कि,सारे लोग गोबर के कन्डो से होली बनाएंगे,कोई लकड़ी नहीं जलाएगा। कंडे बनाने के लिए केवल चौपाए पशुओं के गोबर का उपयोग किया जाएगा। इस मामले में कोई समझौता या छूट नहीं दी जाएगी,जिनके पास पुराने कंडे जमा हैं वे सक्षम अधिकारी के समक्ष घोषणा-पत्र भर कर होली बना सकते हैं। बिना घोषणा वाले काले-कंडों से होली बनाना और जलाना गैरकानूनी होगा। कुछ आदेश प्रशासन को भी दिए कि, वो काले-कंडों के मामले में सतर्क रहें और देखें कि, कौन लोग काले-कंडों से होली बना रहे हैं। इस बात की निगरानी रखें कि,जब उनके पास चौपाए पशु नहीं हैं तो, कंडे किसके गोबर से बनाए गए हैं ! गोबर में किसी और गोबर की मिलावट वाले कंडों पर सख्त कार्रवाई की जाए, प्रजा यदि गोबर के उदगम का संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए, तो उस पर गोबर तस्करी और मिलावट का प्रकरण बनाएँ। जो सभ्य और सुसंस्कृत लोग गोबर से होली खेलते आए हैं,उनके लिए प्रशासन जल्द से जल्द हर मोहल्ले में गोबर-एटीएम की व्यवस्था करे,ताकि प्रजा अपने उपयोग के लिए मान्य-गोबर प्राप्त कर सके। इस बार की होली के लिए एटीएम से सीमित मात्रा में गोबर निकाला जा सकेगा। भविष्य में जैसे- जैसे गोबर की व्यवस्था होती जाएगी, एटीएम चौबीस घंटे काम करने लगेंगे और भरपूर गोबर देने लगेंगे। इसी के साथ सर बी.बी. ने प्रजा को होली और स्मार्ट सिटी की बधाई दी…।

#जवाहर चौधरी

परिचय : जवाहर चौधरी व्यंग्य लेखन के लिए लम्बे समय से लोकप्रिय नाम हैl 1952 में जन्मे श्री चौधरी ने एमए और पीएचडी(समाजशास्त्र)तक शिक्षा हासिल की हैl मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इन्दौर के कौशल्यापुरी (चितावद रोड) में रहने वाले श्री चौधरी मुख्य रूप से व्यंग्य लेखन,कहानियां व कार्टूनकारी भी करते हैं। आपकी रचनाओं का सतत प्रकाशन प्रायः सभी हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में होता रहता हैl साथ ही रेडियो तथा दूरदर्शन पर भी पाठ करते हैं। आपकी करीब 13 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं,जिसमें 8 व्यंग्य संग्रह,1कहानी संग्रह,1लघुकथा संग्रह,1नाटक और 2उपन्यास सम्मिलित हैं। आपने लेखन को इतना अपनाया है तो,इसके लिए आप सम्मानित भी हुए हैंl प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान में म.प्र.साहित्य परिषद् का पहला शरद जोशी पुरस्कार आपको कृति `सूखे का मंगलगान` के लिए 1993 में मिला थाl इसके अलावा कादम्बिनी द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रतियोगिता में व्यंग्य रचना `उच्च शिक्षा का अंडरवर्ल्ड` को द्वितीय पुरस्कार 1992 में तो,माणिक वर्मा व्यंग्य सम्मान से भी 2011 में भोपाल में सराहे गए हैंl 1.11लाख की राशि से गोपालप्रसाद व्यास `व्यंग्यश्री सम्मान` भी 2014 में हिन्दी भवन(दिल्ली) में आपने पाया हैl आप `ब्लॉग` पर भी लगातार गुदगुदाते रहते हैंl

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

One thought on “पशुबंदी और एटीएम से गोबर

  1. बहुत सारे लोग सरकार की कल्याण योजनाओं का लाभ लेते हैं और पशुओं को चारा खिला कर श्रेय उनको दिया करते हैं, इस पर तुरंत रोक लगाने का निर्णय लिया गया है, लेकिन उन नस्ली और पालतू कुत्तों को पशुबंदी से छूट रहेगी जिनके आधार कार्ड बनें होंगे।

    तीखा कटाक्ष है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

चांद....

Wed Mar 15 , 2017
सब कहते शीतल , मनोरम है चांद, खूबसूरत इसे जग कहे पर यह शांत। तिमिर में करता है यह सदा उजाला, इसलिए तो बेदाग कहलाया है चांद। जब होती है रोजाना प्यारी-सी सांझ, मन को लुभाता ढ़लती सांझ में चांद। इसकी महिमा है,बड़ी ही निराली, व्रत तोड़ती है महिलाएं देखकर […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।