हमारी भारतीय संस्कृति के त्यौहार ।
जुड़े हैं पावन गाथाओं से।
रक्षा बंधन के साथ भी
बँधा बलि का दान, मान, व्यवहार।
वामन बन ,विष्णु ने लिया
तीन पाँव धरती का दान।
पर नापते समय हुए, त्रिविक्रम।
बंधन बलि का,
समर्पण शीश का
प्रसन्न हो दिया, सुतल का राज्य।
वर दे, बने वामन, पहरेदार।
नारद ने कहे ,समाचार
हल्ला मचा, वैकुण्ठ में।
लक्ष्मी घबराई।
युक्ति भी शायद
नारद ने ही सुझाई।
राखी का थाल सजा
पहुंची बलिद्वार।
भाई बना ,सजाई राखी हाथ
प्रसन्न बलि ने कहा, माँगो बहना ।
तुम्हारे द्वारपाल है, मेरे पति
छोड़ दें, मान मेरा कहना।
दर्शन की आदत हुई मेरी,
पर बहना की आज्ञा सिर धरी।
वैकुण्ठ पधारे विष्णु ,
दे वचन चतुर्मास वास का।
कहते हैं ,तब से ही
मनाया जाता यह महापर्व।
बहिनों के सुख सुहाग की,
रक्षा के भार का
दिया जाता वचन ।
#पुष्पा शर्मा
परिचय: श्रीमती पुष्पा शर्मा की जन्म तिथि-२४ जुलाई १९४५ एवं जन्म स्थान-कुचामन सिटी (जिला-नागौर,राजस्थान) है। आपका वर्तमान निवास राजस्थान के शहर-अजमेर में है। शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. है। कार्यक्षेत्र में आप राजस्थान के शिक्षा विभाग से हिन्दी विषय पढ़ाने वाली सेवानिवृत व्याख्याता हैं। फिलहाल सामाजिक क्षेत्र-अन्ध विद्यालय सहित बधिर विद्यालय आदि से जुड़कर कार्यरत हैं। दोहे,मुक्त पद और सामान्य गद्य आप लिखती हैं। आपकी लेखनशीलता का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है।