(मंच खुलते ही एक लड़का और छोटी -सी गुड़िया मंच पर आते हैं। लड़के का नाम राजू है,और गुड़िया उसकी बहन जया है।)
राजू-अरे बहना! तुम अभी तक तैयार नहीं हुई ? ये देखो मैं तैयार हो गया।
जया-एक मिनट भाई,तैयार होकर आ रही हूं।
(बहन तैयार होकर आती है,और भैया उसे उस जगह पर ले आता है जहां स्वातंत्र्य पर्व मनाया जा रहा है।)
राजू-यहां आओ मेरी प्यारी बहना,यह देखो(चित्र दिखाते हुए),यह हमारा भारत का नक्शा है,जिसके सभी ओर मोमबत्तियां जलाकर जयहिन्द को रंगोली से लिखकर उस पर केसरिया , सफेद और हरे, नीले रंगों से सजाए गए हैं। देखो बहना।
जया-वाहहह, क्या आकर्षक चित्र है।भैया मुझे तो यह चित्र बहुत अच्छा लग रहा है। सब जगह पर जल रही मोमबत्तियां हर तरफ प्रकाश फैला रही है।
राजू-हां जया।
जया-भैया वहां पर जो जय हिन्द लिखा है,उसका अर्थ क्या है ?
राजू-अभी बताता हूं। जय हिन्द यानि, हिन्दुस्तान की जय हो, हिन्दवासियों की जय हो। हमारा प्यारा भारत ही है। हिन्दुस्तानवासी सभी एक हैं, यहां न जाति प्रमुख है,न ऊंच-नीच। सभी समान होने वाले इस हिन्दुस्तान की धरती की जय हो। यही उसका सच्चा अर्थ है।
जया-भारत का नक्शा और जय हिन्द शब्द पर तीन-चार रंगों से रंगोली सजी हुई है। उन्हीं रंगों का उपयोग क्यों किया गया है ? बाकी रंग भी डाल सकते थे-जैसे लाल,गुलाबी,काला..।
राजू-हां बहना। अलग रंग भी डाल सकते थे,पर इन रंगों का उपयोग ही अच्छा है। इसका भी एक इतिहास है। इनमें जिन रंगों का इस्तेमाल किया गया है,वे हमारे राष्ट्रध्वज के रंग हैं। सबसे ऊपर केसरिया और बीच में सफेद, सबसे नीचे हरा। और बीच में चौबीस तानों का एक चक्र है,जिसे हम अशोक चक्र कहते हैं। वह नीले रंग में है,इसलिए आज जय हिन्द और भारत के नक्शे को भी उन्हीं रंगों से सजाया गया है। समझी।
जया-हां भैया,समझ गई। हां,राष्ट्रध्वज में रहे तीन रंगों की विशेषता क्या है ??
राजू-सुनो, सबसे ऊपर जो केसरिया रंग है वह त्याग और वीरता का प्रतीक है। बीच का सफेद रंग शांति का प्रतीक तो हरा अभिवृद्धि यानि प्रगति का प्रतीक है।
जया-आप तो बहुत कुछ जानते हैं भैया। अरे! ये क्या ये सभी लोग इस छवि से हटकर उस तरफ क्यों जा रहे हैं ? वहां पर उस स्तंभ के ऊपर कुछ बांधा है शायद!
राजू-वह ध्वज स्तंभ है बहना। उसके सबसे ऊपर के छोर पर ध्वज का कपड़ा बांधकर रखा है। अभी थोड़ी ही देर में कोई नेता या महान हस्तियां आकर ध्वजारोहण करेंगे। तब झंडा खूब लहराएगा। झंडा फहराते ही राष्ट्रीय गान शुरू होगा, इसलिए मैं तुम्हें यहां यह सब दिखाने के लिए लाया हूं।
जया-मैं आज बहुत खुश हूं भैया। आपने आज बहुत विषयों के बारे में जानकारी दी।
राजू-अरे वहां देखो। सब झंडे वाली जगह में एकत्रित हो गए। चलो हम भी चलते हैं। इस अभूतपूर्व कार्यक्रम में भाग लेना हमारा परम सौभाग्य है। और हमारा प्रथम कर्तव्य भी।
जया-हां भैया, मैं भी एक अच्छी नागरिक बनकर देश की प्रगति के मार्ग पर चलूंगी। देश और देश के चिन्हों का मान रखूंगी। ठीक है, चलो भैया चलते हैं।
(दोनों ध्वज स्तंभ के पास जाते हैं,और परदा गिरता है।)
#शैलश्री आलूर ‘श्लेषा’
परिचय : डॉ.शैलश्री आलूर का काव्यनाम ‘श्लेषा’ है। प्रारम्भिक शिक्षा के बाद एमए,बीएड और एम.फिल. करके पीएचडी की है। निवास कर्नाटक राज्य के बादामी नगर (जिला बागलकोट) में है। लेखन के लिए आपके पिता श्री शनमुखप्पा ही आपकि प्रेरणा और हिम्मत हैं।