आँगन में दीवार न करना
रिश्तों को अखबार न करना
वाणी मधुर तरल रहने दो
शब्दों को तलवार न करना
मन मरुथल जैसे हो जिनके
उनसे तुम मनुहार न करना
अभी अभी मन को समझाया
फिर पायल झंकार न करना
दिल के मीठे लब्ज पढ़ें थे
कटुता का व्यवहार न करना
प्राण जाए पर वचन न जाये
मन को तुम गद्दार न करना
यार प्यार से ही दिल जीतो
नफरत के व्यापार न करना
मुँह में राम बगल में छुरी
ज़मीर सस्ता यार न करना
धड़कनों से जुड़े हो दिल की
यार दग़ा दिलदार न करना✍
#रागिनी शर्मा (स्वर्णकार)
परिचय : रागिनी शर्मा (स्वर्णकार) की जन्मतिथि-१ मई १९७२ तथा जन्म स्थान-बेगमगंज (रायसेन)है। बी.एस-सी.,एम.ए.(हिंदी-अँग्रेजी साहित्य) शिक्षित होकर आपका कार्यक्षेत्र-व्याख्याता का है। वर्तमान में मध्यप्रदेश के इंदौर में सिलिकॉन सिटी में आपका निवास है। सामाजिक क्षेत्र-गतिविधि में अध्यापन, सामाजिक-साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आपकी सक्रिय सहभागिता है। विधा-हिंदी गीत,मुक्तक, अतुकांत और ग़ज़ल है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-सकारात्मक विचारों का विस्तार करना है।
Fri Jul 6 , 2018
केवल सैनिकों का लहू लाल होता है श्वेत रक्तधारियों की तो बस जिह्वा में उबाल होता है । अगर इन्हें विरोध करना हो सरकारी नीति का तो ये ही उल्लंघन करें संविधान का, और सड़कों पर भी इन्हीं का बवाल होता है। लगा कर आग परिस्थिति से भाग इन्हें ,न […]