मंजिले अब दूर नहीं

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neera jain

जिंदगी हैं आगे बढ़ने के लिए

मंजिलो को पाने के लिए

न रुकने के लिए न थकने के लिए

लाख मुश्किलें आएँगी

मगर निरंतर चलना हैं मुझे

नहीं घबराना रख होंसला

संभालना हैं मुझको।

लोग  बदलेंगे

बदलना हैं मुझको

लड़ती हु निरंतर अपने आप से

क्युकि मुझे पाना हैं मंजिलो को

नै ख्वाहिशे लिए

भरनी हैं ऊँची उड़ान

अब मन चल पड़ा हैं

नए सफर पर

नई मंजिले नए रास्ते

दे रहे आवाज मुझे

अब साथ हैं मेरे  सूरज

और  तारें

आसमा बन गया मेरा होंसला

चल रही साथ मेरे ये ज़मी

साथ मेरे आशा और उम्मीदे

मैं नहीं रुकने वाली क्युकि

अब मंजिले दूर नही। ,

#नीरा जैन 
पता  जयपुर (राजस्थान)
शिक्षा Ba Ma BJMC MJMC…..
लेखिका कवियत्री एंकर मोटिवेशनल स्पीकर ओर आकाशवाणी जयपुर में उदघोषक
प्रकाशन ..समाचार पत्र पत्रिकाओ में लेख प्रकाशित
सदल सुगंध.शब्द शब्द महक.साहित्य उदय , साहित्य कुंदन संगम संकल्पना सांझा काव्य संग्रह में रचनाये प्रकाशित
पुस्तक करियर इन मीडिया प्रकाश्य 
विश्व हिन्दी रचनाकार मंच से वरिष्ठ हिंदी कवियत्री सम्मान 
कविता लोक सृजन  संस्थान से साहित्य सुधाकर संम्मान 
कृतिकार संस्थान की तरफ से साहित्य कुंदन पुरस्कार
पर्यावरण. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ.कन्या भ्रूण जैसे मुद्दों पर जागरूकता को आगे बढ़ाया।
समाज सेवा…बच्चो ओर महिलाओ के विकास के लिए कार्यरत
हरियाणा करनाल से महिला सशक्तिकरण पर कार्य करने हेतु राष्ट्र रतन पुरस्कार से सम्मानित

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।