झमझम करती बारिश आई मुरझाई फसलों में जान आई । धीरे से बरसे बादल घनघोर कल-कल करती नदियां आई ।। मन पुरवाई सजन घर आई मेंढ़क टर्र-टर्र कर नाचे भाई। कोयल कूं – कूं कर दे रही ये संदेश वर्षा से धरती मुस्काई ।। मौसम ने ली देखो अंगडाई सबके […]
काव्यभाषा
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