सौ अरमान देखे,तब जाकर एक अरमान मिला, उम्मीदों की कश्ती में बहकर वो फरमान मिला। अब क्या घबराना ऐसे इन आंधी और तुफानों से, मौत भी आ जाए तो पलटकर वो जंहान मिला। उम्मीदों का सफर फिर उन्हीं रास्तों पर ले चला, कयामत से गुजरकर तकदीर को, वो ईमान मिला। […]
काव्यभाषा
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