रिश्तों का बंधन कही छूट न जाये। और डोर रिश्तों की कही टूट न जाये। रिश्ते होते है बहुत जीवन में अनमोल। इसलिए रिश्तों को हृदय में सजा के रखे।। बदल जाए परस्थितियां भले ही जिंदगी में। थाम के रखना डोर अपने रिश्तों की। पैसा तो आता जाता हैं सबके […]

नित्य उठकर लीजिए परमात्मा का अब नाम अच्छी सुबह हो जायेगी बिगड़े बनेंगे सब काम परमात्मा ही पिता हमारे दुख हर लेते सारे के सारे मिले खुशी जब लगे ध्यान जीवन हो जाता है निष्काम स्वार्थ,लोभ विदा हो जाते क्रोध से भी मुक्त हो जाते मोह ,माया से न कोई […]

इन्दौर। अहिल्या की नगरी इन्दौर हमेशा से ही सेवा की मिसाल बनता रहा है। कोरोना जैसे आपदा में जब लोग अस्पतालों से दूर भाग रहे, ऐसे में मरीज़ों और उनके परिजनों के लिए शासकीय अस्पतालों के बाहर जाकर, सड़कों पर खड़े पुलिसकर्मियों को सेवादूत लगातार पानी आदि सामग्री देकर सेवाएँ […]

खनकती चूड़ियां तेरे मुझे क्यों लुभाती है। खनक तेरी पायल की हमको क्यों बुलाती है। हँसती हो जब तुम तो दिल खिल जाता है। मोहब्बत करने को मेरा मन बहुत ललचाता है।। कमर की करधौनी भी कुछ कहती है। प्यास दिल की वो भी बहुत बढ़ाती है। होठो की लाली […]

परमात्मा कहां चले गए तुम बुला रहे हम नही आए तुम आए हो तो असर दिखला दो कोरोना को जड़ से मिटा दो जो बीमार है उन्हें स्वस्थ बना दो चेहरे पर सबके मुस्कान ला दो खल रहा है अव्यक्त हो जाना सुंदर दुनिया का उजड़ सा जाना अब आ […]

हूँ किस्मत से मजबूर मगर, मेहनत की रोटी खाता हूँ। दौलत शौरहत तो पास नहीं, बस मेहनत पे इतराता हूँ ।। दो वक्त की रोटी की ख़ातिर, दिन रात परिश्रम करता हूँ। बहा कर खून पसीना अपना, परिवार का पेट मैं भरता हूँ। नदियों पर मैं बांध बनाता, रेलों की […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।