हर दर्दे दिल की दवा नहीं होती, टूटता है कुछ यूं भी के सदा नहीं होती। खरीद पाता गुड़िया जो वो उस दुकान से, रात भर उसकी बेटी यूं रोई नहीं होती । उठाता क्यों बूढ़ा रोटी उस कूड़े से, आग जो भूख ने लगाई नहीं होती। लुटाती नहीं जो […]
मंद-मंद मुस्काती बेटी, जीवन का सार सबल बेटी.. गंगा-जमुना-सी निर्मल धार,. झरने-सी,कलकल बेटी। नव आशा का उज्ज्वल दर्पण, पलती-पढ़ती बन होनहार. प्रकृति का उन्मत्त श्रंगार, मुस्कानों का उद्गम स्थल.. जीवन का सार सबल बेटी, मंद-मंद मुस्काती बेटी। बेटे की आस रहा करती, बेटी फसलों-सी लहलहाती.. अपने कर्तव्यों की सीमा पर, […]
