महीनों से सड़क पर कभी धरना कभी प्रदर्शन कभी ट्रैक्टर रैली तो कभी रेल रोको देश में मजबूत विश्वसनीय न्यायप्रणाली पर कहीं खाप कहीं पंचायत कहते किसान ? वह किसान पहचान है जिसकी श्रम और अन्न उगाने में पर यह न जड़ और न ही जमीन। सहारा कभी इस कन्धे […]

वह गीत है जिसमें लगी है सभी की प्रीत आते ही जिसके खिल जाते हैं कोमल पुष्प महक उठते हैं उपवन झूम उठते हैं सभी के मन मौसम- बन जाता है सुहावना नूतन सौन्दर्य छा जाता है चहुं ओर कई तरह के सतरंगी पुष्प खिलकर बढ़ाते हैं शोभा बगीचों की […]

01 सावन आए बादल उमड़ के बरखा लाए। 02 डाली के झूले बनते इतिहास अब सावन। 03 खिल जाता है साजन का साथ पा हाथों का रंग। 04 मोर नांचते कोयल है बांचती घर मेंहदी। शशांक मिश्र भारती (शाहजहांपुर) Post Views: 93

मेरी बालमनोविज्ञानपरक निबन्धों की कृति क्यों बोलते हैं बच्चे झूठ से [ बदलते परिवेश निरन्तर नये- नये परिवर्तनों घर-परिवार एवं विद्यालय के दृष्टिकोण में नूतन आयामों के स्पर्श से और भी समस्याओं के रूप हो सकते हैं। बालक से सम्बन्धित समस्यायें कोई भी हों उनके समाधान हेतु विद्यालय एवं माता-पिता […]

एक दिन रामकृष्ण परमहंस शिष्यों के साथ भ्रमण करते हुए एक नदी के तट पर पहुंचे।वहां कुछ मछुए जाल फेंककर मछलियां पकड़ रहे थे।एक मछुए के समीप जाकर स्वामी जी खड़े हो गए और शिष्यों से कहा – तुम लोग ध्यानपूर्वक इस जाल में फंसी मछलियों की गतिविधियां देखो। शिष्यों […]

हमारे देश के महत्वपूर्ण हिमालयी राज्य उत्तराखण्ड के सीमान्त जनपद का नाम पिथौरागढ़ है जिसको पूरा देश छोटा कश्मीर के नाम से जानता है।इसका पुराना नाम सोर घाटी है।सोर का अर्थ होता है सरोवर। यहां मान्यता है कि पहले यहां सात सरोवर थे जो धीरे धीरे सूख गये।।यहां की भूमि […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।