प्रथमा का चाँद मैं था, नित्य मैं हूँ बढ़ रहा। रंगमंच जीवन यह, स्वांग मैं हूँ रच रहा। नृत्य मैं हूँ कर रहा, नित्य मैं हूँ बढ़ रहा। बढ़ता न सूरज है, बढ़ते न तारे हैं, सूरज से ‘रोशन’ हूँ; जग फिर ‘दमक’ रहा। नित्य गति हूँ कर रहा, नित्य […]

वीर वो सैनिक तम को हराने, जाते जिनके प्राण हैं; जिस मिट्टी से मिल जाते हैं, वह ही ‘दीप’ महान है। दीपक तुम जलते जाना, जगमग जग करते जाना; जल-जल जितना मरुँ ‘पतंगा’, जगमग उतना जग होगा। दीपक तुम जलते जाना, तुझमें आकर मर जाऊंगा। भानु चमकता जगमग जग में, […]

(भाग- २)….. ‘मछ्ली’ आज फिर से उड़ना चाह रही है; ‘मछली’ आज फिर से चलना चाह रही है। चाहत पहले भी उड़ने की; है चाहत पर उड़ने की; चाहत सपना है बन बैठा; सच बस खोना है। चमक उठी है आँखें कब से; सपनों से भरी पड़ी; उन सपनो को […]

                भाग – १ मछली आज उड़ना चाह रही है; मछली आज चलना चाह रही है। नीरस हो चुकी है वह इस समुद्र में रह-रह कर; ऐसा कतई नहीं पसंद नहीं उसे अपना देश; वह तो पूरी दुनिया घूमना चाह रही है। न […]

मस्ताना मैं चलता जाता, गिरता और सम्भलता जाता। ठोकर खा मिट्टी में आया, धूल में सोया आज मैं। कुछ नहीं! मदिरा तेरा यह बहुत अनोखा प्यार है। मदिरा पीकर मैं भी मदिरा, मदिरा यह संसार है, आँखों से न अश्रु बहे, अब मदिरा की यह धार है। मस्ताना मैं; मस्तानी […]

आज सुबह से ही घर में बड़ी चहल-पहल थी ,सभी जल्दी नहा धोकर तैयार थे।  ब्राह्मण भोजन की तैयारियाँ की जा रहीं थीं।  दादा जी को जो भी वस्तु पसंद थी सभी बनाई जा रही थी ।पंडित जी के आते ही भोजन की थाली सजाई गई और पूजन विधि के […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।