प्रथमा का चाँद

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kirti jayaswal
प्रथमा का चाँद मैं था,
नित्य मैं हूँ बढ़ रहा।
रंगमंच जीवन यह,
स्वांग मैं हूँ रच रहा।
नृत्य मैं हूँ कर रहा,
नित्य मैं हूँ बढ़ रहा।
बढ़ता न सूरज है,
बढ़ते न तारे हैं,
सूरज से ‘रोशन’ हूँ;
जग फिर ‘दमक’ रहा।
नित्य गति हूँ कर रहा,
नित्य मैं हूँ बढ़ रहा।
माना कि पूर्णिमा
जीवन में आएगी,
अगले ही क्षण मेरा
जीवन घटाएगी।
क्षण-क्षण घटूँगा मैं,
सुख को रटूँगा मैं।
मन में यह दुःख भरा
“नित्य मैं हूँ घट रहा”।
एक रात्रि माना
अमावस की आएगी,
माना वह रात्रि कि
जीवन ले जाएगी;
पर अंकुर फूटेगा,
जन्म नया पाऊँगा।
फिर से कहूँगा कि
स्वांग मैं हूँ रच रहा,
प्रथमा का चाँद मैं था,
नित्य मैं हूँ बढ़ रहा।
 कीर्ति जायसवाल
इलाहाबाद(प्रयागराज)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।