चुभती है मेरे कानों में खामोशी तेरी हरदम, कुछ तो मरहम लगा दो अपनी बातों से हमदम आहत है दिल मेरा तेरी इस खामोशी के जुल्म से हर रोज बात कर लिया करो नहीं तो बताओ—– कौन तुम्हें ज्यादा बेहतर समझेगा मुझसे अल्फ़ाज़ महकाओ कुछ इस तरह कि, जैसे गुल […]

“आज उनसे पहली मुलाकात होगी फिर आमने सामने बात होगी फिर होगा क्या ;क्या पता क्या ख़बर; फिर होगा क्या ;क्या पता क्या ख़बर”? आज गीतिका बहुत खुश थी और दुनिया से बेखबर होकर वह मन ही मन यह गीत गुनगुना रही थी क्योंकि आज उसकी अपने मंगेतर गिरीश के […]

हर-हर महादेव शिव शंकर हे!बैरागी हे!चन्द्रशेखर नाग वासुकी कण्ठ सुशोभित मस्तक पर द्विज चन्द्र है सुंदर गौरी के गौरव हे! अविनाशी मृत्यंजय हे!गिरि के वासी कांप उठे सब तीन लोक तब डम-डम डमरू नाद करे जब शीश जटा सोहे किलोल भरी अभिषेक करे  पावन जल से भस्मों का श्रृंगार किये […]

आज पुराने किस्सों को फिर नये सुरों में दोहराना है ये आज़ादी का कोरस है हम सबको मिल के गाना है अपने दिल की बात कह दूँ सबसे आज मुझे तिरंगा सबसे प्यारा सूरज तक इसे पहुँचाना  है हुई सुबह तो पंछी जागे मीठे गीत सुनाते हैं उन गीतों में […]

नमामि मात शारदे,नमामि मात शारदे।     विनाश काम क्रोध मोह लोभ मात मार दे।           सदैव सत्य लेखनी लिखे डरे न सार दे।                अनेक भाव शब्द और शुद्ध से विचार दे। उपासना करुं प्रभात से बनी उपासनी।   […]

लाड़,दुलार,मनुहार, और फिर कभी-कभी तकरार के बीच समय ठण्ड की गुनगुनी धूप-सा, यादों की सुराही में सिमट गयाl अब तो समझदारी के ताने-बाने बुनते हुए, कभी उलझते हैं कभी सुलझ जाते हैं, खुद में ही एक दूजे के जज्बातों को एकदम से समझ जाने का, ये जादुई सिलसिला तो अनवरत […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।