फर्स्ट डेट

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“आज उनसे पहली मुलाकात होगी
फिर आमने सामने बात होगी
फिर होगा क्या ;क्या पता क्या ख़बर;
फिर होगा क्या ;क्या पता क्या ख़बर”?

आज गीतिका बहुत खुश थी और दुनिया से बेखबर होकर वह मन ही मन यह गीत गुनगुना रही थी क्योंकि आज उसकी अपने मंगेतर गिरीश के साथ पहली मुलाकात थी लेकिन अचानक ही उसके कानों में एक आवाज गूंजी–” क्यों गीतिका आज तुम्हें किसी से मिलने जाना है क्या”? और यह आवाज उसके पापा की थी गीतिका सहसा सहम गई और घबराकर बोली-” कि नहीं पापा मुझे कहीं भी नहीं जाना ;ऐसा कुछ भी नहीं है! लेकिन उसके पापा समझ चुके थे और वह बोले -“बेटा अगर कहीं भी जाना हो तो घर पर अपनी मम्मी या उन्हें(अपने पापा )को जरूर बता कर जाना क्योंकि यदि उन्हें कहीं और से पता चलेगा तो उन्हें बिलकुल अच्छा नहीं लगेगा! हमारी तरफ से कहीं भी जाने कि मना नहीं है और ना ही किसी से मिलने की मना है परंतु तुम अपनी मर्यादा का ध्यान रखना!” इतना सुनते ही गीतिका की आंखें भर आई और उसे अपनी गलती का अहसास हुआ क्योंकि वह कभी भी अपने पापा से कुछ भी नहीं छुपाती थी और अपनी मां से ज्यादा अपने पापा को सबसे ज्यादा अपने करीब समझती थी उसने तुरंत ही अपने पापा को बताया कि आज उसका मंगेतर गिरीश उससे मिलने आ रहा है और कॉलेज के बाद में वहउससे मिलने जा रही है! गीतिका के पापा बोले-” जाओ बेटा मिल आओ. और साथ में गिरीश के लिए कोई उपहार भी ले जाना”! इतना सुनकर गीतिका की खुशी का ठिकाना ना रहा और इस तरह गीतिका की गिरीश के साथ पहली मुलाकात हुई! उनकी “फर्स्ट डेट “!!

गुंजन शिशिर
वृन्दावन, उत्तरप्रदेश

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।