बेटी क्यो नही चाहिए? माँ चाहिए पत्नी चाहिए प्रेमिका चाहिए बहन चाहिए तो फिर बेटी क्यू नहीं चाहिए? बेटी अभिशाप नहीं वरदान है बेटी सृष्टि का मूल आधार है बेटी संस्कृति की संवहक हे बेटी सभ्यता की पालनहार हे बेटी ईश्वर की अनुकंपा है बेटी एक अनमोल धरोहर है बेटी […]

मातृभाषा का मतलब है कि, माँ से सीखी और बोली जाती भाषा का नाम मातृभाषा है | बालक जन्म के बाद पहली बार जो भाषा बोलता है, वो भाषा अपनी माँ की और उसकी मातृभाषा है | माँ से ही वो मातृभाषा सीखता है | विश्व में ६००० से अधिक […]

  स्वतंत्रता की चलाई आंधी नाम था उसका मोहन गाँधी जनता की उसने बनाई कुमक दांडी से उसने उठाया नमक कस्तूरबा से करवाया श्रम साबरमती मे बनाया आश्रम बचपन में चबाये चने इंग्लैंड जाकर बेरी स्टार बने स्वतंत्रता की ज्योति जलाई भारत देश को आज़ादी दिलाई अंग्रेज को दिखलाया डंडा […]

जमना चाची के पति की मौत हो गई! उन्हे तीन बेटे थे और 4 बेटियाँ भी थी! बेटियाँ की शादी हो चुकी थी! नदी के किनारे गांव में रहते थे, खेती के लिए जमीन थी उसमे बारिश न होने के कारण फसल नहीं होती थी!, एक साल बाद उनकी जमीन […]

सागर में चाहें आए तूफान, तब भी जीवन की नैया, पार कर लूँगा मैं। आपके साथ पाताल से, गगन तक छा जाऊंगा मैं। कुछ ऐसा कर दूँगा मैं,      मेरी याद न मिटे। चाहे फूल जंगल का हो,    सुवास भर दूँगा मैं। रेखाओं से बनाया है, महल सपनों […]

3

मचानी हो तो धूम मचाओ, लेकिन बेटी बचाओ.. चाहे उसे सोना न दिलाओ, लेकिन बेटी बचाओ। चाहे उसे नाच नचाओ, लेकिन बेटी बचाओ.. चाहे उसकी मांगे भगाओ लेकिन बेटी बचाओ। चाहे उसे कम पढ़ाओ, लेकिन बेटी बचाओ.. चाहे उसे दूध न पिलाओ, लेकिन बेटी बचाओ। चाहे उसे पायल न पहनाओ, […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।