*बात पिछली रात की*  जिससे मुहब्बत की जाती है उसे वही तोहफ़ा दिया जाता है जो उसे सबसे ज्यादा पसंद हो, लेकिन कल रात अजीब आशिकों को देखा जो दावा तो मुहब्बत का करते हैं, लेकिन जिससे प्यार करते हैं, उनकी मर्जी के खिलाफ काम करके खूब जश्न मनाते रहे।  […]

*भ्रमर* की तरह ज़िंदगी जीयो कितनी अच्छी होती है ज़िंदगी फूलों से रस लेता है भ्रमर मतलब मिठास को ग्रहण करता वो तुम भी भ्रमर की तरह बनों लोगों के अवगुण नहीं अपितु गुणों को करो ग्रहण तुम मिश्री सी वाणी बोल दिलों में राज करो अदिति रूसिया  वारासिवनी Post […]

यशोमति खुश थी,पति डीएम बन गया था कि,चलो पास न सही दूर है,पर मेरे तो हैं..। भारतीय नारी की तरह सारे गम भुला चुकी थी। पति के इतने बरसों के बेरुख़ेपन के बावजूद ईष्ट का शुक्र मना रही थी। उम्मीद तो बिलकुल नहीं थी कि,उसका पति अपना लेगा,पास बुला लेगा। […]

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मशहूर अर्थशास्त्री जान मलार्ड कीन्स ने कहा था कि,अगर सरकार के पास काम न हो,तो वो सड़क पर गड्ढे खुदवाए और उन्हें भरवाकर लोगों को रोजगार दे। इस सिद्धांत को साम्यवादी देशों ने खूब अपनाया और अब अब अपनी मुंसीपाल्टी ने भी बहुत अच्छे से समझ लिया है। वह इसका […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।