हे प्रिये काश! ऐसा भी हो, मेरी आँखों की पलकें आँसू से भीग जाए, ऐसा भी हो… तेरे विरह की वेदना में प्यार का झरना सूख  जाएl ऐसा भी हो… जनमदिन पर तेरा दिया हुआ उपहार कहीं खो जाए, ऐसा भी हो.. तेरे भेजे गए ई-मेल कहीं डिलीट हो जाएl […]

  फूंऊं.ऽ… ऽ… ऽ… ऽ… ऽ… ऽ… ऽ…यह शंख की  आवाज़ थी-न सिर्फ मंदिर से डूंगा के कान तक,बल्कि गांव के कोने-कुचाले तक पसरी और लंबी। गंधहीन और अदृश्य। ध्वनि भी क्या! बस,शंख के पिछवाडे़ में फूंकी एक लंबी फूंक,जो शंख के मुंह से ऊंचा स्वर लिए,तेजी से बाहर निकली […]

माँ तुम मेरी मूरत हो, हम बच्चों की तुम जरुरत हो। मिल जाए चाहे कितने भी यार, अनमोल माँ तेरा प्यार। माँ मैंने एक कविता सुनी है तेरे बिन मेरा आँगन सूना है। नदिया से बड़ा समंदर है, तेरी छवि मेरे दिल के अंदर है। माँ तेरा मीठा प्यार मैंने […]

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मचानी हो तो धूम मचाओ, लेकिन बेटी बचाओ.. चाहे उसे सोना न दिलाओ, लेकिन बेटी बचाओ। चाहे उसे नाच नचाओ, लेकिन बेटी बचाओ.. चाहे उसकी मांगे भगाओ लेकिन बेटी बचाओ। चाहे उसे कम पढ़ाओ, लेकिन बेटी बचाओ.. चाहे उसे दूध न पिलाओ, लेकिन बेटी बचाओ। चाहे उसे पायल न पहनाओ, […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।