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  जुल्फों में बादलों की घटाओं का फसाना, आंखों में इंद्रजाल का मंजर है सुहाना, चेहरे का नूर कीमती हीरे से कम नहीं- सम्मुख तुम्हारे चांद भी लगता है पुराना। #डॉ. कृष्ण कुमार तिवारी ‘नीरव’ Post Views: 8

रोज तुम मेरा अधूरी ख़्वाब हो गई, धुंधली जिंदगी में,माहताब हो गई। शराबी कहते हैं मुझे आजकल सभी, होंठ तुम्हारे नशीली शराब हो गई। सुलझे मेरे सारे पेंचीदा सवाल, जब आंखें तुम्हारी जवाब हो गई। बागों के पुष्प भी न भाते अब मुझे, सूरत तुम्हारी फूल गुलाब हो गई। जरा […]

गगन को छूने वाले भाव सारी मंडियों के हैं, कहीं से बूंद भर जल को खुले मुख सीपियों के हैं। हमेशा टूट जाते हैं जरा-सा दाब पड़ते ही, यहां जितने भी एलबम हैं सभी बस दफ्तियों के हैं। स्वयं अपनी ही बातों से मुकर जाता है कोई भी, कहूं क्या […]

आज सुन रहा हूँ      मैं भूख की किलकारियां। मेरे घर में भी होती थी           केसर की क्यारियां॥ आज मेरे देश को क्या             हो गया हे राम जी! जिसे देखता हूँ वही             […]

दस्तावेजों की खातिर मैंने, संदूक खोला था आज। दस्तावेजों में पड़ी डायरी, न जानूँ मैं,किससे थी आखिर नाराज। कुछ पन्नों में इत्र की खुशबू थी, तो किसी में,था शब्द-सुरों का साज। पन्नों में अतीत सिमटा था मेरा, हर पंक्ति हर शब्द में जिक्र तुम्हारा। यादों के झरोखे में,मैं झूम रहा […]

  दैनिक का यही निकला परिणाम अंत में, दिन डूब गया हाथ लगी शाम अंत में। दुनिया से दिल लगाने का अंजाम यह हुआ, फोकट में हो गए हम बदनाम अंत में। विश्वास किया जिस पर हद से भी जियादा, इज्जत लिया उसी ने सरेआम अंत में। आंखों में आंसूओं […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।