डायरी…

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krishn modak
दस्तावेजों की खातिर मैंने,
संदूक खोला था आज।
दस्तावेजों में पड़ी डायरी,
न जानूँ मैं,किससे थी आखिर नाराज।
कुछ पन्नों में इत्र की खुशबू थी,
तो किसी में,था शब्द-सुरों का साज।
पन्नों में अतीत सिमटा था मेरा,
हर पंक्ति हर शब्द में जिक्र तुम्हारा।
यादों के झरोखे में,मैं झूम रहा था,
जैसे भंवरा फूल को चूम रहा था।
डायरी कह बैठी मुझसे,
अंत न करना था तो
क्यों किए थे आगाज़।
तुमको में कैसे कह देता कि,
दोषी थी तुम,आज भी तुम पर ही
तो है नाज।
कह दिया मैंने उससे,
मैं ही तुम्हारा दोषी दगाबाज…
मैं ही तुम्हारा दोषी दगाबाज…॥
#कृष्णा कुमार मोदक
परिचय: कृष्णा कुमार मोदक की जन्मतिथि-१२ जून १९९५ और शहर-धनबाद है। आपका निवास झारखंड राज्य के धनबाद शहर में है। शिक्षा-यांत्रिक अभियांत्रिकी में डिप्लोमा एवं कार्यक्षेत्र-रेलवे में कार्यरत है। आपके लेखन का उद्देश्य-सीखते रहना है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।