हिंदी है अगर तेरी मातृभाषा, तो हरियाणवी भी तेरी बोली है! दोनों को साथ लेकर ना तू चला, आंख क्यों ना तूने खोली है!! हिंदी तेरी की सीमा नही है, हरियाणवी की है सुषमा(१)निराली! हिंदी है तेरी रुक्मणि सी, हरियाणवी है तेरी राधा वाली!! ममता […]

फेसबुक की दुनिया ने देखो,  ये कैसा गजब ढाया है! शाम को ही सोने वाले पप्पू को, सारी रात जगाया है!! फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट होते ही, ये मैसेंजर में घुस जाते हैं! हाय, हेलो, कैसी हो डिअर, ये मैसेज की लाइन लगाते हैं! ना दे जवाब कोई लड़की, तो वीडियो […]

चुनावों का मौसम चल रहा है, वोटों की गर्मा-गर्मी है! किसान का हाल देखो, उसकी नस नस में तना-तनी है!! नेता वोट बटोरने में हैं व्यस्त, जा रहे हैं ये जनता के द्वार! किसान को लपेटा आग ने, तो कभी पड़ी ओलों की मार!! दिन-रात कुर्सी के लिए, ये सफेदपोश […]

बौना कर दिया हर पर्वत तूने, इनकी चोटी भी सर झुका रही! किया कदमों को इतने ऊंचे तूने, कि तू आसमान तक जा चढ़ी!! अकेली ही चल पड़ती थी, ना कभी भी कहीं घबराई तू! आज काफिले के साथ , नेतृत्वकारी बनकर तू आगे बढ़ी!! पूरा विश्व तुझ पर गर्व […]

ढूंढने से भी नही मिली आज मैं, खुद ही खुद में मुझे! खो दिया है खुद को देखो, क्यो इतना मैंने चाहा तुझे!! रब्ब जाने कितने अरसे अब, मुस्कुराए मुझको हो गए! मेरा नाम मेरा अस्तित्व देखो, सब तो तुझमें खो गए!! बोललू अगर मैं किसी से, तू उंगली मुझ […]

उसी के दिये दर्दों को, मैं उसी के नाम करती हूं..!! जमाना मुकद्दर नही मेरा, मैं मुकद्दर नही जमाने की! वो तो जमाने से डरता है मैं तो उसी से डरती हूं!! उसी के दिये दर्दों को, मैं उसी के नाम करती हूं!! पैसा हुआ फितरत उसकी,कलम हुई फितरत मेरी! […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।