दिन आये मेरे यार चुनावों के| चर्चे होंगे दिन रात हिसाबों के|| कोई कर्जा माफ़ करेगा, कोई गलियां साफ करेगा| वोटों के बदले में कोई, तेरी जेबें खूब भरेगा|| कोई मारे रोज बांग दुआरे पे| दिन आये मेरे यार चुनावों के|| दिन आये मेरे यार चुनावों के| चर्चे होंगे दिन […]

जब खेतों में नंगी काया पल पल तपती रहती है| आँगन में बैठे ख्वाबों के पंख उतिनती रहती है|| बेवश आँखों में बस केवल नीर समाया रहता है| तब कवि ह्रदय हुकूमत के प्रति आग उगलने लगता है|| नहीं प्रेम के मधुर मधुर मैं गीत सुनाने आया हूँ| वाणी की […]

राष्ट्रभक्ति की बात न भाये , कह अपशब्द बहुत हर्षाये भारत माँ को देते गाली , उछल उछल कर पीटे ताली बात बात पर लड़ने लागे , शोर करे ज्यो करते कागे ऐसे ऐसे कर्मन कीना , दुख दारुण राष्ट्र को दीना , दुश्मन को देते सन्देशा ,फैला दंगा करो […]

एकाएक हमारा राष्ट्र जैसे बिलकुल अनाथ-सा हो गया है। न कोई माँ,न बाप,न भाई,न बहन। न कोई खुशी,न गम। न कोई काम,न आराम। हिंदुओं-मुसलमानों-सिक्खों-ईसाइयों की भीड़ में बिलकुल अकेला। ब्राह्मणों,क्षत्रियों,वैश्यों और शूद्रों से खचाखच भरे होने के बाद भी एक-एक भारतीय के लिए तरसता, बिल्कुल तन्हा-सा हो गया है। आजकल जैसे […]

धन्य जवान ये वीर भगत सिंह,जिसने स्व कुर्बान किया। हँसते-हँसते फाँसी चूमा, आजादी हित बलिदान कियाll स्वतंत्रता के हवन कुण्ड में अपनी आहुति देकर, इंकलाब के नारे का  `मनु`युवा दिलों में आह्वान कियाll   इंकलाब की गूँज उठी,तब हर दिल में बसा तिरंगा था। जब आजादी की लपटों से मौसम का रंग सुरंगा थाll भारत माँ भी धन्य हुई तब पहन के चुनर बलिदानी, जिस चुनर को भगत सिंह ने रंग बंसती रंगा थाll   युवाओं के दिल में मचलता जोश है भगत सिंह। इंकलाब जिंदाबाद का उद्घोष है भगत सिंहll गूँगे-बहरे कुशासन को जगाती बुलंद एक आवाज, जो अंग्रेजी आँधी में भी जलती रही,वो जोत है भगत सिंहll   सरफरोशी की तमन्ना दिल में लिए जो बढ़ चलाl आजादी की पुस्तकों में अमिट गाथा गढ़ चलाll मेरी कुर्बानी से जन्मेंगें सैकड़ों भगत सिंह कह- सौंपने स्वयं को बलिदानी तख्त पर चढ़ चलाll                                                  #मनोज कुमार […]

हमारे देश में तरह-तरह के लोचे होते रहते हैं। कभी केमिकल लोचा हो जाता है,तो कभी टेक्निकल लोचा।राजनीतिक और धार्मिक लोचे तो आए दिन होते ही रहते हैं। वैसे लोचा करने को `लुच्चई` कहते हैं कि नहीं,ये नहीं पता,लेकिन इतना जरूर पता है कि,लोचा और लुच्चई एक दूसरे के सगेसम्बन्धी जरूर […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।