उसे दुख की झुलसाने वाली लपट ने पकड़ लिया था। वह तेज धूप में सूखी लकड़ी की तरह जलती हुई चटख रही थी। उसने दीवारों से अपना सिर  टकराया। वह रोई, बिलखी और गला फाड़कर घिघियाई। वह अपने सिर के उलझे-गुलझे बालों को नचा-नचाकर छत की ओर मुँह करके चींखी–“आख़िर, […]

स्वस्थ शरीर की अगर चाह है, योग ही सबसे सरल राह है। जीवन रोगों से मुक्त करो, प्रतिदिन उठकर योग करो। बहुरंगों के जीवन को तुम, और सजाने का यत्न करो। निश्चित ही जीवन निखरेगा, थोड़ा थोड़ा प्रयत्न करो। रोगों के अंधियारे को तुम, योग दीप से दूर करो। अब […]

वसुन्धरा का आभूषण है , यह सुन्दर सा वन उपवन। भविष्य सुरक्षित है इनसे ही ,सभी जीव जगत और जन ।। पावन वसुधा का निर्मल जल ,है इनसे ही बहुत शुद्ध । यह मनुष्य के साथी हैं ,कह गए कृष्ण और गौतम बुद्ध ।। अमूल्य धरोहर है धरणी की , […]

साहित्य में क्षेत्रीय बोलियों का बोलबाला न हो तो वह नीरस सा हो जाता है | जी हाँ मैं आँचलिक भाषा के महत्व व विकास की ओर आप सभी का ध्यानाकर्षण चाहूँगा | मेरे पुरोधा आ० शिवपूजन सहाय जी ने पहली बार देहाती दुनिया लिख कर आँचलिक उपन्यासकारों की कतार […]

जाओ, तल्ख़ ख़बर लाओ जी ना हो तो तुम बन जाओ जी तरसे तन जिनके गमछे बिन उनके लिए कफ़न लाओ जी सीधी राह जो चलते हो तो धूल-धुंध में सन जाओ जी खुले वसन इच्छा सोई है उसके लिए बटन लाओ जी विधुर स्वप्न भटके मन-द्वारे यादें ! रमणी […]

बाबू जी नहीं रहे, यह खबर सभी रिश्ते-नातेदारों तक पहुँच खई ।  सुदूरवर्ती बेटे को टेलीफून से सूचित कर दिया गया । वह ठीक समय पर पहुँच गया ।  शाम तक  अंतिम क्रियाकर्म के लिए सभी  आ चुके थे। घर के बाहर लोगों का जमावड़ा था। महिलाओं ने बड़ी मुश्किल […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।