तू क्या जाने तुझे कितना प्यार करूँ मैं, इक बार नहीं ,सौ बार करूँ मैं | गुस्सा तुमसे  करता हूँ अपना समझ के, इस बात का डर लगता है, दूर न हो जाओ कहीं तुम मुझसे| दूर न होना  मुझको तुम  बेगाना समझ के, जीना मुश्किल हो जाएगा बिछुड़  के तुझसे| […]

आरक्षण को स्वतंत्र भारत के संविधान में एक समाधान के रूप में शामिल किया गया था,परन्तु आज उसी आरक्षण ने समस्या बनकर पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद हुआ,तब भारतीय समाज जातीय व्यवस्था पर आश्रित थाI दलितों के साथ उचित न्याय हो सके,उन्हें भी समाज […]

संतों की भी टूटती रही है समाधियां,  सत्ता के भी डोलते रहे हैं सिंहासन.. प्रेम की खनक से,  उन्माद की चमक से..  यही प्रेम……..जब  टेसू को छूकर  जंगलों से आता है,  गरम हवाओं पर तैरता हुआ  एक शीतल एहसास बनकर,  तो जीवंत हो उठती है,  प्रेम की सारी अधखुली कलियां.. […]

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आसमां  में, उड़ती हुई पतंग..  यूँ लगता है, सरसर ध्वनि-सी किलकारी करते हुए,  बाबुल के आँगन में..  खेल रही वो स्वतंत्र।   कई बार प्रयास  के बाद भी, डोर न काट सके उसकी.. कई तागे,क्योंकि वो बंधी है,  विश्वास की अटूट  डोर से..  जो मजबूत हाथों में है।   पलटकर […]

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  अपने पापा के साथ आज रुही जाने वाली थी,अपनी नानी के घर। गुलाबी फ्रॉक पहने हुए बेहद खूबसूरत लग रही थी रुही। पापा ने स्कूटर पर बिठाया, किक लगाई और लेकर चल दिए रूही को उसकी नानी के घर। रुही को दादी ने तैयार किया था,पर दादी कुछ उदास […]

कहें क्या बात हम अपनी, हमारी बात ही क्या है। जमाने के सताए हैं, जमाने की कहें क्या हम? बात ही बात में जज्बातों की कुछ बात  कहते हैं, जमाना है किसी का न। सभी स्वार्थ के हैं साथी, बेबात कोई भी न मिला। दोस्त तो न मिला कोई, दुश्मन […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।