मैं और तुम

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तुम बिखरें घरों को जोड़ने वाले,
दो टूटे  हदयों को जोड़ने वाले,
मैं
बने बनाये घरो को तोड़ने वाला,
दो
की छोड़ो ,तीन की छोड़ो न जानें कितनो के ह्दय को तोड़ने वाला?
इसे क्या नाम दूँ?
भूल कहूँ?
नही-नही,
यह तो एक और भूल है।
इसे कहूँ प्रवंचना,
जो आपके साथ हुई।
प्रवंचना का कँहा मिला
दण्ड?
जो औरो को मिला करता है।
पर क्या?
बिखरे ह्दय भी माफ़ किया करते है?
मैनें देखा एक विशाल खंडित ह्दय को,
जो धीरता से धरती को भी
लज्जित करता हैं।
वह अपनों के आगे सब कुछ न्यौछावर किया करता है।
ह्दय की अग्नि में ज्वलित
चिंगारी के भाग लिये,
वे शबनम के भाव लिए फिरता है।
खुद खंडहरौ के अवशेष लिए बैठा है,
पर मानवता के महलो की आश लिए फिरता है।

वह मर चुका है,
लेकिन ह्दय में,अब भी
शेष स्वांस लिए जिता है।

#सतवीर गोस्वामी
पल्लू

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।