शांतिनिकेतन यात्रा संस्मरण (भाग 7) कंकालितला मंदिर

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बोलपुर में शांतिनिकेतन, विश्वभारती और सृजनी शिल्पग्राम के भ्रमण के बाद हमारा अगला लक्ष्य कंकालितला मंदिर के दर्शन का था…
माँ काली को समर्पित यह प्रसिद्ध मंदिर बोलपुर से करीब 10 किमी की दूरी पर स्थित है…

पश्चिम बंगाल लोक कला और संस्कृति के साथ धार्मिक आस्था का भी प्रमुख केंद्र रहा है… देवी के 51 शक्तिपीठों में कई शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल में ही स्थित हैं…

नलहाटी में देवी नलतेश्वरी, सैंथिया में देवी नन्दिकेश्वरी, लाभपुर में देवी फुल्लारा और कंकालितला में देवी कंकाली…ये शक्तिपीठ वीरभूम जिले में तारापीठ के आसपास ही अवस्थित हैं…

हिन्दू मान्यता के अनुसार जहां जहां देवी सती के शरीर के अंग गिरे…वहां वहां शक्तिपीठ बने और वो स्थल हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए पावन तीर्थ कहलाये… ये पावन तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हुए हैं…

कंकालितला मंदिर भी उनमें से एक है… इस स्‍थान पर देवी सती का कंकाल यानी कमर का हिस्‍सा गिरा था…

कोपाई नदी के तट पर देवी के मंदिर को गर्भगृह के रूप में जाना जाता है… कहा जाता है कि देवी एक प्राकृतिक तालाब के तल में स्थित हैं… यह तालाब मंदिर परिसर में ही स्थित है… तालाब के चारों तरफ सीढ़ियां बनी हुई हैं… कई श्रद्धालु भक्त तालाब के किनारे भी पूजा अर्चना करते हैं…मंदिर के समीप पूजा सामग्री की कई दुकानें सजी हैं…बगल में एक मैदान है जिसमें दशहरा के दौरान मेला लगता है… देश भर से श्रद्धालु अपनी मनोकामना के साथ इस शक्तिपीठ में दर्शन के लिए जुटते हैं…

वर्ष 2019 मेरे लिए इस मायने में विशेष महत्व का रहा कि इस वर्ष दो शक्तिपीठों के दर्शन का सौभाग्य मिला…अप्रैल में मैसूर स्थित माँ चामुंडेश्वरी देवी का दर्शन और अक्टूबर में कंकालितला स्थित माँ कंकाली का…

माँ सबों पर अपनी कृपा बनाये रखें…

#डा. स्वयंभू शलभ

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।