कर लो सुध कुदरत की आज,

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कर लो सुध कुदरत की आज,
की है हमने जिससे छेड़छाड़।
करके छिद्र ओजोन परत में,
क्यों रहे स्वार्थ के झंडे गाड़।

अपनी धरा के सुरक्षा कवच को,
हम सब मिलकर तोड़ रहे।
बो कर कांटे राहों में अपनी,
फूलों की बाट जोह रहे ।

अपने आराम कि खातिर हमने,
अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है।
अपने स्वार्थ सिद्धि की खातिर ,
बरबादी का कृत्य अब भी जारी है।

पराबैंगनी किरणें सूर्य की ,
हम सबके लिए घातक हैं।
प्रकृति द्वारा रचित अनुपम,
ओजोन ही हमारी रक्षक है।

त्वचा ,नेत्र और कैंसर जैसी,
नित फैल रही महामारी हैं।
संभल जाओ अब नादानों,
अब जान पर बनी हमारी है।

ओजोन बिना मत कर कल्पना,
वसुंधरा पर जीवन की।
हो जाएगा विनाश धरा पर,
यदि की हमने अपनी मनमानी।

अंधाधुंध वनों की कटाई,
और वाहनों का दूषित धुआं ।
अपनी लालसाओं में अंधे हम,
खुद खोद रहे मौत का कुआं।

दे रही चेतावनी प्रकृति ,
सुनों पृथ्वीलोक के प्राणी,
बहुत हो चुका तेरा नाटक,
बन्द करो अपनी मनमानी।
ओजोन बिना वसुधा कैसी,
वसुधा बिन जीवन कैसा।
जरा सोच कर देखो प्राणी,
होगा सृष्टि का भविष्य कैसा।

आओ प्राचीन परम्परा अपनाएं,
धरा को हरा भरा बनाएं।
प्रौद्योगिकी पर कस कर सिकंजा,
ओजोन सुरक्षा कवच बचाएं।

रचना-
सपना (स ०अ०)
औरैया

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।