जयचंदों के रूप मिलेंगे..

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abhivrut

गंगा दूषित हो जाएगी,लज्जित होते भूप मिलेंगे
कलयुग में न जाने कितने,जयचंदों के रूप मिलेंगे।

सब मनु रोगी हो जाएंगे,सैनिक लोभी हो जाएंगे,
नित्य नए नव धर्म चलेंगे,साधु भोगी हो जाएंगे।

सागर को उपदेशित करते,जग के सारे कूप मिलेंगे,
कलयुग में न जाने कितने,जयचंदों के रूप मिलेंगे।

ज्ञानी मौन रहेंगे जग में,अनपढ़ ज्ञानी हो जाएंगे,
सत्तालोभी,कपटी,द्रोही,सब अभिमानी हो जाएंगे।

भोली जनता को छलने को,नित्य नए प्रारूप मिलेंगे,
कलयुग में न जाने कितने,जयचंदों के रूप मिलेंगे।

विध्यारुपा शोषित होगी,मंचों पर लक्ष्मी छाएगी,
मर्यादा का मोल न होगा,लज्जा को लज्जा आएगी।

लालच होगा सबसे ऊपर,सब इसके अनुरुप मिलेंगे,
कलयुग में न जाने कितने,जयचंदों के रूप मिलेंगे।

धोखा देकर जीत मिलेगी,दुष्टों के घर मीत मिलेंगे,
चारण हो जाएंगे सब कवि,रचते वन्दन गीत मिलेंगे।

झूठ पुरस्कृत होगा जग में,सत्य सदा विद्रूप मिलेंगे,
कलयुग में न जाने कितने,जयचंदों के रूप मिलेंगे।

   #डॉ.अभिवृत अक्षांश

 

परिचय : डॉ.अभिवृत अक्षांश कवि,लेखक और विचारक के रुप में हिन्दी में शानदार लेखन करते हैं। आप हिन्दी सेवा समिति के अध्यक्ष भी हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।