नाराजगी

Read Time1Second

devendr soni
रिवाज़ सा हो गया है आजकल
बात- बेबात पर नाराज रहने का।

यह नाराजगी होती है ,
कभी अच्छी तो
कभी देती है पीड़ा अधिक
पर मैं इसे हमेशा सुखद ही
मानता हूँ ।

चलता है इससे मन में
रूठने और मनाने का द्वंद
जो उपजाता है -अंततः करुणा
परिणित होना ही होता है जिसे
फिर आनन्ददायी प्रेम में।

रहती है जब तक यह
सीमा में अपनी
देती है सीख कई , नयी-नयी
पर तोड़े जब यह मर्यादा
मिलती है फिर पीड़ा घनी।

चुनना हमको ही है , इनमें से
नाराजगी का कोई एक – रूप
सुख से रहना है या
रहना है फिर दुखी सदा ।

अटल सत्य है यह तो
रहना है ज़िंदा जब तक
छूट सकती नही हमारे
स्वभाव से नाराजगी ।

होती है यह ज्यादा कभी तो
खुद ही हो भी जाती है कम
समझ लें इसको थोड़ा सा
और खुशहाल रहें हरदम।
   #देवेंन्द्र सोनी, इटारसी

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

रिखब चन्द राँका  राष्ट्रीय स्तर पर होंगे सम्मानित

Wed May 23 , 2018
 जयपुर| विशुद्ध स्वर्णिम संयम दीक्षा महोत्सव राष्ट्रीय कार्यकारिणी के प्रचार प्रमुख व  मातृभाषा उन्नयन संस्थान राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष श्री रिखब चन्द राँका ‘कल्पेश’ जयपुर  को  साहित्यिक क्षेत्र में उत्कृष्ट सृजन व समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान हेतु हरियाणा की साहित्यिक संस्था विलक्षणा एक सार्थक पहल समिति (रजि 02314) द्वारा […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।