मगर देर से

jayati jain
ईश्वर को ढूढ़ने निकली थी मिला मुझे वो देर से
खुदा भी मिल जाता मुझे पर पता चला कुछ देर से ।
इत्तेफाक ही था जो निश्छल मुस्कुराहट देखने मिली
कहीं औऱ नहीं वह यहीं है पहचाना मगर देर से ।
अब तक मूरत मज़ार को उसका घर समझ रही थी
ये तो नाम के ठिकाने हैं सारे पता चला मगर देर से ।
गरीब भी झोली फैलता है अमीर भी हाथ फैलाता है
किसी की ख्वाहिशें पूरी नहीं यकीं हुआ मगर देर से ।
भक्त से भगवान बनने की काबिलियत है सभी में
खुद को खुदा बना सकते जाना है मैंने मगर देर से ।
भूखे नंगे बेघर सड़क किनारे मिल जाते हैं अक्सर
झूठे मंदिर मस्जिद के दानी सारे समझी मगर देर से ।
#जयति जैन “नूतन”
परिचय:-
युवा लेखिका, सामाजिक चिंतक, आलोचक
स्थायी पता- भोपाल 
शिक्षा /व्यवसाय- डी. फार्मा , बी. फार्मा , एम. फार्मा ,/ फार्मासिस्ट , लेखिका
विधा – कहानी , लघुकथा , कविता,  लेख , दोहे 
प्रकाशित रचनाओं की संख्या- 350 से ज्यादा रचनायें समाचार पत्रों व पत्रिकाओ में प्रकाशित 
प्रकाशित रचनाओं का विवरण – वर्तमान लेखन: सामाज़िक लेखन, दैनिक, साप्ताहिक अख्बार,  पत्रिकाये , 
चहकते पंछी ब्लोग, साहित्यपीडिया, शब्दनगरी,  www.momspresso.com व प्रतिलिपि वेबसाइट, international news and views.com (INVC) पर !
 सम्मान- “विश्व हिंदी रचनाकार मंच” द्वारा संचालित “रचनाकार प्रोत्साहन योजना” के अन्तर्गत “श्रेष्ठ नवोदित रचनाकार सम्मान” से सम्मानित !
 अंतरा शब्द शक्ति सम्मान 2018 से सम्मानित !
भारत के युवा कवि कवियत्री के तहत JMD पब्लिकेशन (दिल्ली ) दुआरा श्रेष्ठ युवा रचनाकार सम्मान से सम्मानित ।
अन्य उपलब्धि- बेबाक व स्वतंत्र लेखिका ! हिंदी सागर त्रेमासिक पत्रिका में ” अतिथि संपादक ” 
लेखन का उद्देश्य- समाज में सकारात्मक बदलाव !
साझा काव्य संग्रह
मधुकलश 
अनुबंध
प्यारी बेटियाँ
किताबमंच 
आगामी काव्य संग्रह – भारत के युवा कवि औऱ कवयित्रियाँ एवं कुछ अन्य ।
 अनगिनत ऑनलाइन व ऑफलाइन पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित हो रही हैं रचनाएँ ।
रानीपुर (जिला झांसी उप्र) की  पहली लेखिका होने का गौरव ।
लेखन के क्षेत्र में 2010 से अब तक ।
 

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