Advertisements
keshav
तुम मेरे साथ हो तो,
सांसे मेरी चलती हैं।
अगर तुम दूर हो तो,
जां मेरी निकलती है।
ये दुनिया अजायबघर है,
यहाँ सब आता-जाता है।
ओ मेरी दिलरुबा तुझसे,
जन्म-जन्मों का नाता है।
जां मेरे सपनों में न आना,
दिल की हकीकत हो तुम।
मुझे कभी भुला ना जाना,
हो मेरी सबकुछ तुम्ही तुम।
तुमसे जब नजरें मिली मेरी,
दिल में तस्वीर ही उतर गयी।
अब तो तुम्हें अपना बनाकर,
मेरी पूरी दुनिया बदल गयी।
क्यों दूर-दूर रहती हो मुझसे?
क्यों आती नही हो मेरे पास?
अब ओ मेरे जानेमन तेरे बिना,
मेरा दिल रहने लगा है उदास।
मैंने अपना दिल तुम्हे दिया है,
पास मेरे अब आ भी जाओ।
मेरे दिल में रहो-धड़कन में रहो,
मेरी आँखों में तुम समा जाओ।
मुझे अब और न तुम तड़पाओ,
तुम आ जाओ-तुम आ जाओ।।

         #केशव कुमार मिश्रा

परिचय: युवा कवि केशव के रुप में केशव कुमार मिश्रा बिहार के सिंगिया गोठ(जिला मधुबनी)में रहते हैं। आपका दरभंगा में अस्थाई निवास है। आप पेशे से अधिवक्ता हैं।

About the author

(Visited 21 times, 1 visits today)
Please follow and like us:
0
http://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2018/04/keshav.pnghttp://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2018/04/keshav-150x150.pngArpan JainUncategorizedकाव्यभाषाanamika,keshavतुम मेरे साथ हो तो, सांसे मेरी चलती हैं। अगर तुम दूर हो तो, जां मेरी निकलती है। ये दुनिया अजायबघर है, यहाँ सब आता-जाता है। ओ मेरी दिलरुबा तुझसे, जन्म-जन्मों का नाता है। जां मेरे सपनों में न आना, दिल की हकीकत हो तुम। मुझे कभी भुला ना जाना, हो मेरी सबकुछ तुम्ही तुम। तुमसे जब नजरें मिली मेरी, दिल में...Vaicharik mahakumbh
Custom Text