vinod tiwari

बिखरते टूटते दम तोड़ते
बेज़ार से रिश्ते।
सिसकते चीखते हर सू दिखें
बीमार से रिश्ते।

कभी शबनम सी फ़ितरत थी,
गुलों के जैसी नरमाई;
मगर अब तो सुलगकर हो गए
अंगार से रिश्ते।

न मिलने पर ख़ुशी कोई
नहीं ग़म है बिछड़ने का;
किसी साधु के जैसे हो गए
होशियार से रिश्ते।

अँधेरी सर्द रातों में
किसी कचरे के डिब्बे में;
पड़ी नवजात बच्ची की तरह
लाचार से रिश्ते।

ग़रीबों से किनारा है
अमीरों पर मेहरबाँ  हैं;
मियाँ होने लगे हैं
देश की सरकार से रिश्ते।

नहीं तहज़ीब है बाकी
नहीं लहजे में है नरमी;
किसी मजदूर को ज़िल्लत
भरी फटकार से रिश्ते।

नया है तो नज़र में है
पुराना है तो रद्दी में;
जिधर देखो उधर ही हो गए
अखबार से रिश्ते।

                      #विनोद तिवारी “मानस”

परिचय: 

नाम- विनोद तिवारी “मानस”
जन्मतिथि- 19-12 1986

पिताजी- श्री लालता प्रसाद तिवारी

माताजी- श्रीमती गुड्डी तिवारी

पत्नि- श्रीमती चन्दा तिवारी

जन्म स्थान- भादौर

शिक्षा- एम. ए.(हिंदी साहित्य)

कार्यक्षेत्र- शिक्षक

पता- ग्राम व पोस्ट भादौर,तहसील आरोन, जिला गुना (म.प्र.)
पिन-473101

उपलब्धि- *”ग़ज़ल- इक जिज्ञासा”* साझा ग़ज़ल संग्रह, *”मेरी साँसे तेरा जीवन”* पर्यावरणीय दोहा साझा संकलन एवं कुछ रचनाओं को समाचार पत्र, पत्रिकाओं में स्थान मिला।

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