महत्वपूर्ण सूचना

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असंयमितता, अनियमितता और अभ्रद्रता के चलते कुछ लोगों को संस्थान से बाहर कर दिया गया है| मूलत: मातृभाषा.कॉम का मालिकाना हक व संस्थापन डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’ द्वारा किया गया है| मातृभाषा.कॉम सहित हिन्दीग्राम, अन्तराशब्दशक्ति व मातृभाषा उन्नयन संस्थान भी उन्हीं के निर्देशन व डॉ.प्रीति सुराना जी के साथ से संचालित है | कुछ लोगो द्वारा रचनाकारों में भ्रम फैलाया जा रहा है कि ‘वे हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा की ओर ले जाने के लिए कार्य कर रहे हैं, और इसलिए आर्थिक सहयोग भी मांग रहे है, तो आपका दायित्व ये बनता है कि उनसे पूँछे कि उन्होंने हिन्दी के लिए क्या किया है ?
मातृभाषा.कॉम व हमारे अन्य प्रकल्प से उनका कोई संबध नहीं है | यदि आप भी मातृभाषा.कॉम, हिन्दीग्राम, अन्तरा शब्दशक्ति या मातृभाषा उन्नयन संस्थान के भ्रम चलते उनसे कोई भी व्यवहार करते है, आर्थिक या अन्य तो इसके उत्तरदायी आप होंगे|
और यदि कोई हमारे नाम का दुरूपयोग करते, पूर्व में संस्थान के प्रकाशित समाचारों का प्रचार माध्यम में भी उपयोग करते पाया गया तो उसके विरुद्ध कानूनन कार्यवाही की जाएगी |

*आज्ञा से,*
*डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’*
*संस्थापक- मातृभाषा.कॉम*
*सम्पर्क- ७०६७४५५४५५

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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।