राजतंत्र बनाम लोकतंत्र

Read Time3Seconds

sunil parik

राजतंत्र उखाड़ा हमने, आज का लोकतंत्र निराला है।

चाबी है भूखे नेताओं के पास , प्रजातंत्र के ताला है ।।
नेताओं के वादों ने,जनता को गुमराह कर डाला है।
बहाया है पैसा खरबों, ये तंत्र राजशाही का साला है।।
आज़ाद भारत ने सोचा,देश का संविधान रखवाला है ।
प्रश्न इस न्यायपालिका पर, ये कानून मिटने वाला है।।
सत्ता के भूखे नेताओं ने, आज पहनी विजय माला है।
धर्म के नाम  हिंसा फैलाओ,अब ये नारा दे डाला है।।
ताला जड़ा गरीबी के , देश में भ्रष्टाचार को पाला है।
आजादी के सत्तर वर्षों में, इन्होंने कचूमर निकाला है।।
बहनों की इज्जत साख में,हिंसा का फैला जाला है।
सपने है विकसित भारत के,आज गंगा गंदा नाला है।।
गाँधी सुभाष के देश में, रामरहीम आसाराम को पाला है।
धर्म के नाम मानवता बिकती,नेताओं का काम निराला है।।
खून पसीने की कमाई को, मँहगाई ने जला डाला है।
‘शनि’ कर सेवा देश की, ये लोकतंत्र ही बचाने वाला है।।
#सुनील कुमार पारीक ‘शनि’
परिचय : सुनील कुमार पारीक का साहित्यिक उपनाम-शनि  हैl आपकी जन्मतिथि-१ दिसमबर १९८९ तथा जन्म स्थान-सिकराली (राजस्थान) है। वर्तमान में आपका निवास राजस्थान राज्य के चुरू जिला स्थित गाँव-बम्बू में हैl बी. ए.,बी.एड.,एम.ए.(हिन्दी) तथा एम.एड. शिक्षित श्री पारीक का कार्यक्षेत्र-व्याख्याता (हिन्दी) हैl आपको कविता लिखना अधिक पसंद है। आपके लेखन का उद्देश्य-मातृभाषा का विश्व में प्रसार करना है। 
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

खर्चीले विवाहों का औचित्य ?

Thu Mar 15 , 2018
वर्तमान में मुझे विवाह की परिभाषा बदलती हुई नजर आ रही है। अब विवाह का अर्थ वि + वाह ! पर आधारित हो गया है अर्थात विवाह वही जिसे देखकर लोग कहें – वाह वाह ! वाह वाह ! यह स्थिति कमोवेश हर वर्ग में देखने को मिल जाती है […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।