फागुन आयो

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rajesh sharma
अलविदा बसंत
फागुन आयो,
रंग-बिरंगी
संग होली लायो,
चंग ढप ढोल
डफली बजी,
ढोल की थाप पर
नाचे नर-नार रे,
टेसू के फूल खिले
रंग करो तैयार,
इन रंगों में छिपा
मधुर प्रेम व्यवहार,
होलिका जलेगी
सब होली मनाएंगे,
राक्षसी वृतियां जलेगी
होगा पाप का, 
धर्म का प्रहलाद बचेगा
होगी हरि की जयकार,
आयो फागुन को त्योहार
मौसम में सूरज की गर्मी,
लगती नहीं अब अच्छी
बैठ न पाते कोई धूप में,
फागुन की ये गर्मी
लठमार बृज की होली,
और बिहारी जी के दर्शन
फागुन की ये रेलम-पेलl 
देखो कैसे-कैसे खेलll 
#राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’
परिचय: राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ की जन्मतिथि-५ अगस्त १९७० तथा जन्म स्थान-ओसाव(जिला झालावाड़) है। आप राज्य राजस्थान के भवानीमंडी शहर में रहते हैं। हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है और पेशे से शिक्षक(सूलिया)हैं। विधा-गद्य व पद्य दोनों ही है। प्रकाशन में काव्य संकलन आपके नाम है तो,करीब ५० से अधिक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा आपको सम्मानित किया जा चुका है। अन्य उपलब्धियों में नशा मुक्ति,जीवदया, पशु कल्याण पखवाड़ों का आयोजन, शाकाहार का प्रचार करने के साथ ही सैकड़ों लोगों को नशामुक्त किया है। आपकी कलम का उद्देश्य-देशसेवा,समाज सुधार तथा सरकारी योजनाओं का प्रचार करना है।
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