मेरा अब्दुल्ला 

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कहावत है बेगानी शादी में अब्दुल्ला दिवाना,
इश्क की शमा में सदा जलता है परवाना।
आदत से मजबूर ये दो भले ही किरदार हैं,
अंदाज मजाकिया लेकिन बात वजनदार है।
अपनी खुशी मे खुश हुए तो क्या खुश हुए,
अपने गम मे अगर गमगीन हुए तो क्या हुए।
मजा तो पराई खुशी में मुस्कुराने का है,
दूसरों की खुशी पर ठहाके लगाने का है।
अपनी आग में तो हर कोई जलता है,
शमा की आग में परवाना मचलता है।
दिवानों की बातें दिवाने ही जानते हैं,
जलने का मजा परवाने ही जानते हैं।
जो मजा खोने में है वो पाने में कहां ?
जो मजा जन्नत में है, वो जमाने में कहां ?
त्याग और आसक्ति में त्याग ही सदा महान है,
संसार अब्दुल्ला और परवानों की दास्तान है।
ये महज किरदार नहीं,जुनून जज्बा और दर्शन है,
जिन्दगी निकटता का नहीं,दूरियों का आकर्षण है।
अब्दुल्ला बने बिना जिन्दगी अधूरी है,
शमा की आग ही परवाने की धुरी है।
हो सके तो इस आग को कभी बुझने मत देना,
अपने अंदर के अब्दुल्ला को कभी मरने मत देना॥
             #डॉ. देवेन्द्र  जोशी

परिचय : डाॅ.देवेन्द्र जोशी गत 38 वर्षों से हिन्दी पत्रकार के साथ ही कविता, लेख,व्यंग्य और रिपोर्ताज आदि लिखने में सक्रिय हैं। कुछ पुस्तकें भी प्रकाशित हुई है। लोकप्रिय हिन्दी लेखन इनका प्रिय शौक है। आप उज्जैन(मध्यप्रदेश ) में रहते हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।