परम्परा…!

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manmohan gupta
                जिसने गर्भस्थ होते ही
अपार सहन की थी
वेदनाएं-
निशि-दिन-उबकियां,अपच
कभी चक्कर तो कभी
और कुछ।
खाना-पीना दुश्कर रहा,
कई मास तक
तब जाकर असीमित
प्रसव-वेदना को सहन कर
मुंह देखा था-
स्नेह के उपहार का,
लालन-पालन के दिवस
बीते,फूल की सुगंध देने के समय
मिला-किनारा वात्सल्य नद से,
माता से विमाता कर दिया उसने
बुढ़ापे में दिखा-दिखा
अनाथालय का रास्ता,
दुर्बल हाथ-झुर्रियों से
घिरा मुख,
मांग रहा था उसके लिए ही-दुआएं
खैरियत की-
खुदा से,ईसा से,ईश्वर से
और वाहे गुरू से।
यही परम्परा रही है-
मां की शुरू सेll  

#मनमोहन गुप्ता 

परिचय : मनमोहन गुप्ता की शैक्षिक योग्यता एम.ए (हिन्दी,इतिहास, पत्रकारिता)और एम.एड. हैl आप शिक्षा विभाग से २०१३ में स्वैच्छिक सेवानिवृत हुए हैंl वर्तमान में बतौर सम्प्रति स्वतंत्र साहित्य लेखन जारी हैl प्रकाशन एवं प्रसारण देखें तो १९६९ में दैनिक अखबार में प्रथम प्रकाशन हुआ थाl तत्पश्चात आकाशवाणी जयपुर,मथुरा और आगरा से अनवरत प्रसारण होता रहा है,जिसमें राज्य स्तरीय रूपक `परिवर्तन` आकाशवाणी मथुरा के माध्यम से लखनऊ केन्द्र से प्रमुख रूप से प्रसारित होना हैl आपको भरतपुर में ‘लोहागढ़ कौ झरोखा’ के संस्थापक स्तम्भ लेखन का कार्यानुभव हैl ऐसे ही कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं और साक्षात्कार प्रकाशित हुए हैं।मनमोहन गुप्ता का निवास राजस्थान के मण्डी अटलबंद(भरतपुर) में हैl

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।